गर्व था भारत-भूमि कोकि महावीर की माता हूँ।। राम-कृष्ण और नानक जैसेवीरो की यशगाथा हूँ॥ कंद-मूल खाने वालों सेमांसाहारी डरते थे।। पोरस जैसे शूर-वीर कोनमन ‘सिकंदर’ करते थे॥ चौदह वर्षों तक वन मेंजिसका धाम था।। मन-मन्दिर में बसनेवाला शाकाहारी राम था।। चाहते तो खा सकते थेवो मांस पशु के ढेरो में।। लेकिन उनको प्यार मिला‘ […]
Month: August 2014
अनुच्छेद ३७० संघीय संविधान में एक अस्थायी और संक्रमणकालीन व्यवस्था थी । राज्य की संविधान सभा द्वारा जम्मू कश्मीर रियासत के भारत में अधिमिलन की पुष्टि कर दिये जाने के पश्चात् इस की उपयोगिता स्वत समाप्त हो गई थी । काल प्रवाह में जम्मू कश्मीर में संक्रमण काल भी समाप्त हो गया । इससे इस […]
राष्ट्र जागरण के पुरोधा कवि मासूम गाजियाबादी जी से ‘उगता भारत’ की एक विशेष बातचीत जो लोग इस (नीचे Photo में) शेर से परिचित है, वो इसके शायर से भी परीचित होंगे। एक आम आदमी की संवेदना को इतनी बारीकी से उकेरने वाली वह कलम सचमुच किसी परिचय की मुंहताज नही है, जिसे लोग मासूम गाजियाबादी […]
नरेश भारती हाल में भारत के गृह मंत्रालय ने सरकार और समाज के बीच दूरी को पाटने की क्षमता रखने वाले सामाजिक माध्यम या कथित ‘सोशल मीडिया’ के उपयोग और भारत की राजभाषा हिन्दी के महत्व को रेखांकित करते हुए शासकीय कामकाज में हिन्दी का उपयोग करने के निर्देश जारी किए थे। मेरे जैसे विदेशस्थ […]
पिछले पृष्ठों पर हमने शाहिद रहीम साहब का उद्घरण प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने भारत के आर्यावत्र्तीय स्वरूप का उल्लेख किया है। अपने अतीत के गौरवमयी पृष्ठों के आख्यान के लिए उनका वह उद्घरण बड़ा ही अर्थपूर्ण और तर्कपूर्ण है। उनके इस तथ्य की पुष्टिके लिए मनुस्मृति (1.2.22.29) का यह श्लोक भी ध्यातव्य है- आ […]
Acharya Bal krishna ji चीकू मूलतः दक्षिण अमेरिका में एवं अन्य उष्णकटिबंधीय भागों में प्राप्त होता है तथा भारत में भी इसकी खेती की जाती है | यह वृक्ष समुद्र के किनारों के प्रदेशों में विशेषतया उत्पन्न होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल वर्ष में अत्यधिक समय तक होता है | इसके फल में […]
1947 ई. के जम्मू-कश्मीर राज्य की सीमाओं का निर्माण उससे सही सौ वर्ष पूर्व हुआ था, जब अमृतसर की संधि के अंतर्गत अंग्रेजों ने जम्मू-लद्दाख के शासक महाराजा गुलाब सिंह को कश्मीर घाटी को अपने राज्य में मिला लेने की सहमति दे दी थी। आज के पाक अधिकृत कश्मीर और भारतीय कश्मीर को मिलाकर देखने […]
बिखरे मोती भाग-61
सारा खेल बिगाड़ दे, एक अहंकार की चूकगतांक से आगे….दुष्टों का सहयोग ले,उपकृत हो यदि संत।श्रेय को लेवें दुष्टजन,कड़वा होवै अंत ।। 695 ।। भाव यह है कि सत्पुरूषों को चाहिए कि जहां तक हो सके किसी सत्कार्य में दुष्टों का सहयोग नही लेना चाहिए। अन्यथा दुष्टजन सत्कार्य का श्रेय स्वयं लेकर संतों को उपेक्षित […]
गतांक से आगे…..जम्मू-कश्मीर के विषय में महाराजा हरिसिंह को महाराजा न मानना नेहरू की चौथी ऐतिहासिक भूल:देश की सबसे बड़ी रियासत जम्मू-कश्मीर भारत की 556 रियासतों में अकेली ऐसी अभागी रियासत है जिसके महाराजा हरिसिंह को महाराजा मानना बंद कर दिया गया और उनके पुत्र युवराज कर्ण सिंह को उनका उत्तराधिकारी महाराजा नही मानकर उन्हें […]
गतांक से आगे…..जिस प्रकार इन थोड़े से शब्दों का नमूना दिखलाया गया, उसी तरह सभी ऐतिहासिक शब्दों पर प्रकाश डाला जा सकता है। किंतु हम वेद भाष्य करने नही बैठे। हमें तो केवल थोड़ा सा नमूना दिखलाकर पाठकों से यह निवेदन करना है कि वे थोड़ी देर के लिए अपने मगज में जमे हुए इस […]