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बिखरे मोती

काम नचाता मनुज को, मारग पकड़े प्रेय।

विशेष – मनुष्य को जीवनभर कौन नचाता है ? काम नचाता मनुज को, मारग पकड़े प्रेय। कामना से बढ़ै कामना, मारग भूलै श्रेय॥2629॥ तत्त्वार्थ:- काम अर्थात् इच्छा, स्पृहा ये आकाश की तरह अनन्त है जो जीवनभर पूर्ण नहीं होती हैं। कैसी विडम्बना हैइच्छाओं से भी इच्छाएँ बढ़ती चली जाती हैं । इनकी पूर्ति के लिए […]

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बिखरे मोती

मानव जीवन कब धन्य होता है ?*

ईश्वर – प्रणिधान में, अपना समय गुज़ार। काल – कुल्हाड़ा शीश पें, कब करदे प्रहार॥2625॥ तत्त्वार्थ – ईश्वर प्रणिधान से अभिप्राय है प्रभु की शरणागत होना अर्थात भक्ति के साथ-साथ ऐसे कर्म करना जिनसे प्रभु प्रसन्न हो ,निष्काम-भाव से उन्हें प्रभु के चरणों समर्पित करना ऐसे प्रभु-प्रेम को योगदर्शन ने ईश्वर – प्रणिधान कहा है। […]

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बिखरे मोती

कार्यक्षेत्र के शिखर पर , जब पहुँचे इन्सान।

जब इन्सान अपनी कला की बुलन्दी पर होता है: – कार्यक्षेत्र के शिखर पर , जब पहुँचे इन्सान। दुनियां चक्कर काटती, बने खास पहचान॥2607॥ पक्षी मंडराने लगें, ज्यो फल पकता जाय। गुणी-ज्ञानी इन्सान की, दुनिया कीर्ति गाये॥2608॥ विदाई के संदर्भ में विशेष शेर :- ऐ सितारो ! तुम्हारे मुनव्वर से , ये सभा रोशन हो […]

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बिखरे मोती

क्रिया में कर्मत्त्व को, भरता है संकल्प

बिखरे मोती मनुष्य का कायाकल्प कब होता है ? :- क्रिया में कर्मत्त्व को, भरता है संकल्प । साहस और विवेक से, होता कायाकल्प॥2599॥ कर्मत्त्व अर्थात् अभीष्ट लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरन्तर कर्मरत रहना। संकल्प – पक्का इरादा दूर-दृष्टि कायाकल्प – विकासमान होना विशेष :- परलोक सुधारना है तो कर्माशय सुधारों: – जाग सके, […]

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बिखरे मोती

जन्नत से भी बढकर, वो माँ होती हैं

माँ के संदर्भ में “शेर“ :- चलती- फिरती भी , जो दुआ देती है। जन्नत से भी बढकर, वो माँ होती हैं॥2594॥ पिता के संदर्भ में ‘शेर ‘ :-** आसमान से भी ऊँचा, जिसका अरमान होता है। फरिश्ते से कभी बढ़कर, वह पिता होता हैं॥2595॥ शेर:- सावधान ! इन्सानी चोले में शैतान भी है:- दिलों […]

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बिखरे मोती

जिनके लिए संसार में , मनुआ पाप कमाय।

विशेष जाग जाओ, धोखे में मत रहो :-* विशेष जाग जाओ, धोखे में मत रहो :- जिनके लिए संसार में , मनुआ पाप कमाय। एक दिन ऐसा आयेगा, इनसे धोखा खाय॥2587॥ विशेष : – आत्मस्वरूप को कौन जानता है ? :- आत्मवित ही जानता, अपना आत्मस्वरूपा । अवगाहन करे ब्रह्म में, हो जाता तद् रूप॥2588॥ […]

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बिखरे मोती

मानव शरीर को ब्रह्मपुरी क्यों कहा गया है ?*

बिखरे मोती विषेश – मानव शरीर को ब्रह्मपुरी क्यों कहा गया है ? मन बुध्दि और आत्मा, का तन है संघात । रचना प्रभु की श्रेष्ठ है। प्रभु से हो मुलाक़ात॥2582॥ तत्वार्थ : – प्रभु- प्रदत्त यह मानव – शरीर मात्र मन, बुध्दि, आत्मा और इन्द्रियों का संगठन नहीं अपितु इस देव-भूमि और ब्रह्मपुरी भी […]

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बिखरे मोती

ब्रह्मचित्त जो हो गया, मिले ब्रह्म निर्वाण।

आत्म – कल्याण कैसे हो:- ब्रह्मचित्त जो हो गया, मिले ब्रह्म निर्वाण। काम- क्रोध से मुक्त हो, होय आत्म-कल्याण॥2572॥ ब्रह्मचित्त अर्थात जिसका चित्त ब्रह्म जैसा हो । ब्रह्मनिर्वाण अर्थात्-मोक्ष वे कौन सी तीन चीजें हैं, जो संसार में दुर्लभ है:- दर्लभ मानव जन्म है, मोक्ष और सत्संग। पुण्यात्मा को मिले, इन तीनों का संग॥2573॥ जीवन, […]

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आज का चिंतन बिखरे मोती

जीवन की पतवार है, संयम और विवेक ।

  बिखरे मोती जीवनी नैया की पतवार क्या है! जीवन की पतवार है, संयम और विवेक । संयम साधै संतुलन, विवेक लगावै ब्रेक॥2560॥ विशेष :- सुख-शान्ति का स्रोत कहाँ है ? :- धन में संतुष्टि नहीं, अध्यात्म देय संतोष । देवयान का मार्ग ये, सुख-शान्ति का कोष॥2561॥ विशेष :- जब हृदय परिवर्तन होता है, तो […]

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बिखरे मोती

संकल्प से हो दीक्षा, दीक्षा से पुरस्कार।

बिखरे मोती आत्मसुधार का क्रम क्या है?!- संकल्प से हो दीक्षा, दीक्षा से पुरस्कार। श्रध्दा होवे गी अटल, होगा आत्मसुधार॥2549॥ प्रभु- मिलन कैसे हो ? जितना जड़ता में रहे, उतना हरि से दूर। जड़ता अहं को त्याग दे, तो मिले नूर से नूर॥2550॥ ब्रह्माण्ड में सबसे अधिक पवित्र कौन है ? :- इस सारे ब्रहमाण्ड […]

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