क्यों कहते हो मुझे खिसकता रेत मुट्ठी का, मेरी ‘ मुट्ठी ‘ में है बदलना चाल नियति का। क्यों कहते जाते हो मुझे मैं खामोश रहता हूं ? मर्यादा है छिपी इसमें बताऊं हाल हृदय का।। जो करना था मुझे न कर सका अफसोस मुझको है, डटे रहना -लगे रहना- मिली यह सोच मुझको है। […]