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भारतीय संस्कृति: आत्मा का ब्रह्मरंध्र और कर्म चक्र से संबंध

बहुत सुना है आपने क्या लेकर तू आया जग में क्या लेकर तू जाएगा ? उपरोक्त के अतिरिक्त सुना है कि न कुछ लेकर के आए ना कुछ लेकर जाना। खाली हाथ आए थे खाली हाथ जाना है। क्या यह कहना सत्य है? हम ले करके आते भी हैं और लेकर के जाते भी हैं। […]

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पंच एवं पंचायत की भारतीय परंपरा

ऋषिराज नागर (एडवोकेट) हमारे देश में पंच को परमेश्वर मानते हैं। पंच भी वही कहलाता है जो न्याय पूर्वक फैसला करता है,आज के आधुनिक युग में पंच – पंचायत का वैज्ञानिक प्रभाव काफी कम होता जा रहा है। जैसे परमपिता परमेश्वर अपनी व्यवस्था में प्रत्येक प्राणी के साथ न्याय करते हुए उसे उसके कर्मों का […]

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राजस्थान की कलात्मक विरासत को सहेजती महिलाएं

शेफाली मार्टिन्स जयपुर, राजस्थान राजस्थान के विभिन्न हस्तशिल्प कलाओं में लाख की चूड़ियां अन्य आभूषणों से बहुत पहले से मौजूद थी. वैदिक युग की यह ऐतिहासिक विरासत कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन व्यापारियों और कारीगरों के हाथों से चली आ रही है जो निर्माण से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग हैं. इसके विभिन्न […]

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ईश्वर पूजा का वैदिक स्वरूप-

कृष्ण कान्त वैदिक, देहरादून महर्षि के अनुसार ‘‘जो ज्ञानादि गुणवाले का यथायोग्य सत्कार करना है उसको पूजा कहते हैं।’ परमेश्वर की पूजा की क्या विधि हो सकती है? वेद कहता है कि परमात्मा आत्मिक, मानसिक, शारीरिक, सामाजिक आदि बलों का देने वाला है। इसी कारण से सकल देव एवं समस्त विश्व उसकी उपासना-पूजा- सेवा सत्कार, […]

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कश्मीरी रामायण:रामावतारचारित

डाo शिबन कृष्ण रैणा कश्मीरी भाषा में रचित रामायणों की संख्या लगभग सात है। इनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय ‘‘रामवतरचरित“ है। इसका रचनाकाल 1847 के आसपास माना जाता है और इसके रचयिता कुर्यग्राम/कश्मीर निवासी श्री प्रकाशराम हैं। सन् 1965 में जम्मू व कश्मीर प्रदेश की कल्चरल (साहित्य) अकादमी ने ‘रामावतारचरित’ को ‘लवकुश-चरित’ समेत एक ही जिल्द […]

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विष्णु आख्यान*. भाग – 2

विष्णु आख्यान. पार्ट/ 2 Dr D K Garg कृपया अपने विचार व्यक्त करे और अन्य ग्रुप में फॉरवर्ड करें क्षीर सागर:,पांच फन वाला शेषनाग , विष्णू के लक्ष्मी जी पैर दबाती हुई का विश्लेषण जैसा कि आप जानते है ईश्वर को ओम मुख्य नाम के अतिरिक्त उसने हजारों कार्यों के कारण हजारों नाम से जाना […]

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विष्णु आख्यान*. भाग/ 1

विष्णु आख्यान. पार्ट/ 1 Dr D K Garg कृपया अपने विचार व्यक्त करे और अन्य ग्रुप में फॉरवर्ड करें विष्णू को लेकर पुराणों और पोराणिको में बहुत भ्रांति है , तरह तरह की कथाएं प्रचलित है,अच्छी खासी तुकबंदी है,कही विष्णु को सर्वुव्यापी ईश्वर बताया गया है तो इन्ही कथायो में विष्णू को शरीरधारी मानव के […]

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वैदिक सृष्टि संवत की वैज्ञानिकता और कालगणना

कल्पसंवत का प्रचलन अनुचित है। केवल सृष्टि संवत ही प्रामाणिक है। वेद उत्पत्ति संवत की अवधारणा गलत है। भारतवर्ष पर महर्षि दयानंद का इतना ऋण है कि हम सदियों तक नहीं चुका सकते। अगर मैं यह कहूं कि आर्य समाज के लोगों पर तो स्वामी दयानंद के विशेष ऋण हैं, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं […]

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वेद और वैदिक संस्कृति की विशिष्टता, भाग – 3

गतांक से आगे क्रमशः केवल वही साथी पढ़ें जो अपनी बुद्धि कौशल, ज्ञान बल , चातुर्य एवं तर्कशक्ति को समृद्ध करना चाहते हैं। वेद विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ हैं। वेद अपौरुषेय हैं। वेदों में नदियों पहाड़ों राजाओं के नाम नहीं हैं। वेदों में राजाओं का कोई इतिहास नहीं है। वेदों में किसी भी राजा की […]

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अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण वर्ष-भर चर्चित रहा नारनौल का मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट

(नववर्ष-विशेष) अपने आईपीएस बेटे मनुमुक्त ‘मानव’ की असमय मृत्यु उपरांत दुनिया-भर के युवाओं में मनु के अक्स को देखते हुए, उन्हें ट्रस्ट के माध्यम से पुरस्कार प्रदान कर, आगे बढ़ने के हेतु प्रेरित करते हैं ट्रस्टी कांता भारती और चीफ ट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’।यह संभवतः दुनिया का एकमात्र ट्रस्ट है, जिसे बेटे की स्मृति में […]

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