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भारतीय संस्कृति

उपनिषद रहस्य –

ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, एतेरेय, तैतिरीय, बृहदारण्यक, छान्दोग्य और श्वेताश्वर आदि 11 उपनिषदों का अत्युत्त्म सरल हिन्दी व्याख्यान। 1250 पृष्ठ सजिल्द। उत्तम छपाई। मूल्य ₹ 540 प्राप्ति के लिए 7015591564 पर whatsapp करें. उपनिषद् ब्रह्मविद्या के मूलाधार हैं। प्रस्तुत संस्करण में 11 उपनिषदों को संकलित किया गया है – 1) ईशोपनिषद् – यह […]

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सरल शब्दों में वेद

प्रायः यह कहा जाता है कि वेद केवल विद्वानो के लिए है। वेद की भाषा और शैली दोनों नीरस हैं। वेदों के अर्थों के समझना और याद रखना कठिन है। इसी समस्या का हल है यह पुस्तकें। वेदमंत्रों का सरल भाषा मे शब्दार्थ और भावार्थ इनकी विशेषता है। विद्वान लेखक ने अति सरल शब्दों मे […]

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वैदिक धर्म में तलाक नहीं हो सकता •

• • वेद की सम्मति में एक बार पति-पत्नी रूप में जिसका हाथ पकड़ लिया, जीवन भर उसी का हो कर रहना चाहिये • • Vedas : not in favour of Divorce • आचार्य प्रियव्रत वेदवाचस्पति वैदिक धर्म में तलाक की भी जगह नहीं हैं। वर-वधू को विवाह से पूर्व भली-भाँति देख-भाल और पड़ताल करके […]

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सृष्टि के परमपिता ब्रह्मा के बाद महर्षि कश्यप रहे

आचार्य डॉ. राधे श्याम द्विवेदी सृष्टि के दूसरे परमपिता महर्षि कश्यप कश्यप एक वैदिक ऋषि थे । ऋग्वेद के सप्तर्षियों में से कश्यप सबसे प्राचीन और सम्मानित ऋषि हैं । कश्यप को ऋषि-मुनियों में श्रेष्ठ माना गया हैं। इनके पिता ब्रह्मा के पुत्र मरीचि ऋषि थे। मरीचि ने कला नाम की स्त्री से विवाह किया […]

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ओ३म् “वैदिक धर्म ही सनातन धर्म है जो ज्ञान-विज्ञान पर आधारित होने सहित संसार का प्राचीनतम धर्म है”

============ वैदिक धर्म वेदों पर आधारित संसार का ज्ञान व विज्ञान सम्मत प्राचीनतम धर्म है। यह सनातन धर्म है क्योंकि यह परमात्मा प्रदत्त वैदिक ज्ञान पर आधारित होने के कारण संसार का आदि व प्रथम धर्म है। सनातन एवं नित्य शब्दों में समानता है। नित्य उसे कहते हैं जो इस सृष्टि व पूर्व सृष्टियों सहित […]

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ओ३म् “वैदिक धर्म ही सनातन धर्म है जो ज्ञान-विज्ञान पर आधारित होने सहित संसार का प्राचीनतम धर्म है”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वैदिक धर्म वेदों पर आधारित संसार का ज्ञान व विज्ञान सम्मत प्राचीनतम धर्म है। यह सनातन धर्म है क्योंकि यह परमात्मा प्रदत्त वैदिक ज्ञान पर आधारित होने के कारण संसार का आदि व प्रथम धर्म है। सनातन एवं नित्य शब्दों में समानता है। नित्य उसे कहते हैं जो इस सृष्टि व […]

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ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि का क्रमिक निर्माण

आचार्य डॉ. राधे श्याम द्विवेदी ब्रह्म देव जी की उत्पत्ति :- भारतीय दर्शन शास्त्र में ब्रह्मा जी का नाम के पीछे निर्गुण निराकार और सर्वव्यापी चेतन शक्ति के लिए ‘ब्रह्मा’ शब्द का प्रयोग बताया गया है। सभी गुणों से पूर्ण होने के कारण उन्हें ब्रह्मा नाम से पुकारा जाता है। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्माजी अपने […]

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अपने दिन को आनंदित बनाइए

प्रातःकाल शुभ दिवस आरंभ कीजिए , अपने दिन को आनंदित बनाइए , स्फूर्ति जगाइए और जीवन के संकट को भगाइए तथा स्वस्थ तन व मन पाइए । प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना। प्रातर्भगं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रातः सोममुत रुद्रं हुवेम॥ [*हे स्त्रीपुरुषो ! जैसे हम विद्वान् उपदेशक लोग (प्रातः) प्रभात वेला में (अग्निम्) स्वप्रकाशस्वरूप (प्रातः) (इन्द्रम्) […]

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तुलसीदास की दोहावली में लोकजीवन के नीति तत्वों का निरुपण*

* (डॉ. परमानंद तिवारी- विनायक फीचर्स) भारतीय संस्कृति अनेकानेक झंझावातों से गुजरती हुई इस अवस्था को प्राप्त हुई है। कई लोगों ने ‘स्वान्त: सुखाय’ की संकल्पना पर आधारित रघुनाथ गाथा को लोक आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक संरचना का तात्कालिक संविधान कहा है। तुलसी की रचनाओं का आधार लोक कल्याण ही था। इसमें सभी वर्गों […]

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उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए माता-पिता का संतुलित मर्यादित आचरण बहुत आवश्यक है

[पुरुष व स्त्री दोनों के ब्रह्मचर्य से युक्त होने से ही उत्तम संतान होती है] (१) एक ग्वालियर के मारवाड़ी ने स्वामी दयानंद जी के जीवन की एक कथा सुनाई। उसने बतलाया कि स्वामीजी के उपदेशों की चर्चा सुनकर एक प्रतिष्ठित मुसलमान भी उनके पास गया, परन्तु उसका मुख सर्वदा उदास रहता था। स्वामीजी ने […]

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