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देश विदेश संपादकीय

प्रधानमंत्री मोदी के लिए मॉरीशस की महत्ता

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में उन देशों को प्राथमिकता दी गई है जो भारतीय धर्म, संस्कृति और इतिहास की परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रति संकल्पित हैं । भारतीय मूल के प्रवासियों की संतानों के रूप में मॉरीशस की अधिसंख्य हिंदू जनसंख्या ने भारत के प्रति अपने समर्पण को प्रकट करने में कभी […]

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इतिहास के पन्नों से

अफगानिस्तान का हिंदू वैदिक अतीत भाग 2 – गांधार महाजनपद और रामराज्य

*मैक्समूलर* अपनी पुस्तक ‘हम भारत से क्या सीखें’ में लिखते हैं- यह निर्णीत हो चुका है कि हम सभी पूर्व से ही आए हैं। इतना ही नहीं हमारे जीवन की जितनी भी प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण बातें हैं, सबकी सब हमें पूर्व से ही मिली हैं। ऐसी स्थिति में जब भी हम पूर्व की ओर जाएँ […]

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महत्वपूर्ण लेख संपादकीय

राम मंदिर और संघ की राष्ट्रवादी चिंतनधारा

17 मार्च 2024 को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संपन्न हुई। जिसमें एक प्रस्ताव राम मंदिर निर्माण के संदर्भ में पारित किया गया।इस प्रस्ताव में राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में संपन्न हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा गया कि श्री अयोध्या धाम में […]

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महत्वपूर्ण लेख

….तो क्या इतिहास मिट जाने दे, अध्याय 14 “भारत जोड़ो” से “पूर्वोत्तर छोड़ो” तक पहुंची कांग्रेस

आज़ादी से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य उस समय के असम और बंगाल के भाग हुआ करते थे। जब कांग्रेस और मुस्लिम लीग की नीतियों के चलते देश का विभाजन हुआ तो पूर्वी बंगाल पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान के साथ चला गया। मजहब के आधार पर हुए इस विभाजन ने देश को […]

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संपादकीय

विपक्ष के चूहों की भागदौड़ और प्रधानमंत्री मोदी

अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 10 सीटों पर भाजपा ने निर्विरोध चुनाव जीतकर यह स्पष्ट कर दिया है कि पूर्वोत्तर भारत में उसका कोई विकल्प नहीं है । इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में गड़बड़ी कराकर भाजपा पर चुनाव जीतने का आरोप लगाने वाले विपक्ष को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि आखिर उसने अरुणाचल प्रदेश में […]

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इतिहास के पन्नों से देश विदेश

अफगानिस्तान का हिन्दू वैदिक अतीत भाग 1 – राजा ययाति के वंशज और अफगानिस्तान

आज भारतवर्ष में ही नहीं, संसार में भी जितनी भर भी जातियाँ और उनके गोत्र पाए जाते हैं, वह सभी गोत्र हमारे प्राचीन ऋषियों के नामों पर पड़े हैं। इस सत्य और तथ्य को यदि भारत के वैदिक इतिहास के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह तथ्य पूर्णतः स्थापित और स्पष्ट हो जाएगा कि इस […]

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महत्वपूर्ण लेख

…… तो क्या इतिहास मिट जाने दें , अध्याय 13 ‘मीरजाफरी परंपरा’ : गांधी से गांधी तक

महात्मा गांधी ने कभी हमारे देश में ‘खिलाफत आंदोलन’ चलाया था। बहुत लोग हैं जो यह मानते हैं कि खिलाफत का अर्थ अंग्रेजों का विरोध करना था। जबकि सच यह नहीं था। सच यह था कि टर्की के खलीफा को अंग्रेजों ने जब उसके पद से हटा दिया तो उसकी खिलाफत अर्थात धार्मिक जगत में […]

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इतिहास के पन्नों से हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

……तो क्या इतिहास मिट जाने दें ? अध्याय 12 भारतीय हिंदू शुद्धि सभा के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज

जब से मुसलमान भारत में आए तब से ही उन्होंने भारत के वैदिक धर्म को समाप्त करने का बीड़ा उठा लिया था। भारत पर उनके किए गए आक्रमण का उद्देश्य राजनीतिक न होकर धार्मिक अधिक था। काफिर लोगों को मिटाकर इस्लाम का परचम लहराना ही उनका प्रमुख उद्देश्य था। अपने इस उद्देश्य से प्रेरित होकर […]

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इतिहास के पन्नों से

तो क्या इतिहास मिट जाने दें, अध्याय 11 , हमारी सांझी विरासत और खालिस्तानी आंदोलन

इतिहास इस बात का साक्षी है कि भारत की वैदिक हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए ही गुरु नानक जी ने नानक पंथ अर्थात सिक्ख मत की स्थापना की थी। उन्होंने अपने जीवन काल में कभी भी कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया जो भारत की वैदिक संस्कृति और समाज को कष्ट देने वाला या […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

….तो क्या इतिहास मिट जाने दें, अध्याय 10 , ओमप्रकाश राजभर और महाराजा सुहेलदेव की आत्मा

सुहेलदेव भारतीय इतिहास के एक ऐसे महानायक हैं जिन पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्हीं के नाम पर उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर नाम के एक नेता सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी चलाते हैं। वास्तव में सुहेलदेव इस समय राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका राजनीति में सिद्धांत क्या है ? – […]

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