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इतिहास के पन्नों से

मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 8 (ख ) मालदेव और मेवाड़ की जनता

मालदेव और मेवाड़ की जनता अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ का प्रभार जिस मालदेव को सौंपा था वह भी नई परिस्थितियों पर बड़ी सूक्ष्मता से दृष्टिपात कर रहा था। महाराणा हमीर सिंह के उत्थान से वह भयभीत रहने लगा था। उसे पता था कि उसके शासन को स्थानीय प्रजा जन स्वीकार नहीं करते और वह अपना […]

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महत्वपूर्ण लेख

136 दिन की इस यात्रा से किस को क्या लाभ हुआ ?

नीरज कुमार दुबे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का समापन हो चुका है। 136 दिनों तक चली इस यात्रा पर सरसरी नजर डालें तो यह अपने नाम के विपरीत नजर आई क्योंकि बात भारत जोड़ो की हो रही थी और इसमें ऐसे लोग शामिल रहे जो अलगाववादी और टुकड़े-टुकड़े वाली मानसिकता रखते […]

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इतिहास के पन्नों से

मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 8 (क) फिर से चित्तौड़ छीनने वाला महाराणा हमीर सिंह

फिर से चित्तौड़ छीनने वाला महाराणा हमीर सिंह राणा अजय सिंह ने जब अपने भतीजे हमीर सिंह का राजतिलक किया तो उस राजतिलक ने हमीर सिंह के सिर पर कांटों का ताज रख दिया था। जी हां, एक ऐसा ताज जिसे पहन कर रातों को नींद नहीं आ सकती थी और दिन में चैन नहीं […]

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इतिहास के पन्नों से

मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 7 ( ख ) कठिनाइयों का दौर और राणा अजय सिंह

कठिनाइयों का दौर और राणा अजय सिंह हम यहां पर यह भी स्पष्ट करना चाहेंगे कि कैलवाड़ा अरावली पर्वत पर बसा हुआ एक नगर है। इस नगर में राणा अजय सिंह अपने दुर्दिनों के उस दौर को काट रहा था। वह उस समय किसी से भी किसी प्रकार की शत्रुता मोल लेने की स्थिति में […]

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मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 7 ( क ) राजा अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई.)

राजा अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई.) मेवाड़ की भूमि की महानता इसके बलिदानों में है। यही कारण है कि भारत में जब बलिदानों की बात चलती है तो मेवाड़ का नाम सबसे पहले लिया जाता है। भारत की वीर परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में सचमुच मेवाड़ की वीरभूमि का सबसे महत्वपूर्ण योगदान […]

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मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 6 ख चित्तौड़ अभियान पर इतिहासकारों के मत

चित्तौड़ अभियान पर इतिहासकारों के मत अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ अभियान पर मुहम्मद हबीब का कहना है कि अलाउद्दीन खिलजी के नेतृत्व में शाही सेनाएं राजस्थान में प्रवेश कर गंभीरी और वेहद नदियों के बीच पहुंचकर शिविर लगाकर और चित्तौड़ दुर्ग का घेरा डालकर युद्घ के लिए सन्नद्घ हो गयीं। सुल्तान ने अपनी सेना को […]

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इतिहास के पन्नों से

मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 6 क राणा रतन सिंह का बलिदान और मेवाड़ के प्रजाजन

राणा रतन सिंह का बलिदान और मेवाड़ के प्रजाजन भारत के रोमांचकारी इतिहास का यह एक गौरवशाली प्रमाण है कि यहां के वीर वीरांगनाओं ने अपने देश के स्वाभिमान के लिए अपना प्राणोत्सर्ग करने में तनिक भी विलंब नहीं किया। देशभक्त वीर वीरांगनाओं ने सदा देश के मान सम्मान को आगे रखा और बड़े स्वार्थ […]

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संपादकीय

अमृत महोत्सव के उषाकाल में बसंत और गणतंत्र का पर्व

देश के लिए सचमुच वह ऐतिहासिक पल थे जब हमने पहली बार 26 जनवरी 1950 को एक गणतंत्र के रूप में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था। उस दिन सारे देश में खुशी का एक अलग ही मंजर था। हम सबने एक साथ, एक दिशा में, एक सोच के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया […]

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मेवाड़ के महाराणा और उनकी गौरव गाथा अध्याय – 5( ख ) राणा रतन सिंह पहुंचे युद्ध क्षेत्र में

राणा रतन सिंह पहुंचे युद्ध क्षेत्र में राणा भीमसिंह के युद्घ में जाने का अभिप्राय था कि आज का सूर्य या तो चित्तौड़गढ़ के पतन को देखेगा या फिर उसके उत्कर्ष को अपने अंक में समाकर अगले दिन के सूर्योदय को इस प्रसन्नतादायक समाचार के साथ सौंप देगा कि भारत की भूमि वीर सपूतों की […]

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इतिहास के पन्नों से

गौतम बुद्ध और बौद्ध धर्म =एक विस्तृत अध्ययन* पार्ट 4

Dr DK Garg Note -यह आलेख महात्मा बुद्ध के प्रारम्भिक उपदेशों पर आधारित है। ।और विभिन्न विद्वानों के विचार उपरांत है। ये 9 भाग में है। इसको पढ़कर वे पाठक विस्मय का अनुभव कर सकते हैं जिन्होंने केवल परवर्ती बौद्ध मतानुयायी लेखकों की रचनाओं पर आधारित बौद्ध मत के विवरण को पढ़ा है । कृपया […]

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