छठ पूजा का त्योहार जो पहले मुख्य रूप से बिहार के कुछ भागों मे मनाया जाता था,अब देश के कई भागों में मनाया जाने लगा है । छठ पूजा अभी भी बिहार के प्रत्येक जिले मे पूर्ण रूप से नही मनाया जाता है। घर परिवार वाले प्रायः छठ पूजा के लिए नव दम्पति को […]
छठ पूजा का त्योहार जो पहले मुख्य रूप से बिहार के कुछ भागों मे मनाया जाता था,अब देश के कई भागों में मनाया जाने लगा है । छठ पूजा अभी भी बिहार के प्रत्येक जिले मे पूर्ण रूप से नही मनाया जाता है। घर परिवार वाले प्रायः छठ पूजा के लिए नव दम्पति को […]
काशी शास्त्रार्थ पर विचार #डॉविवेकआर्य सन् 2023 में इतिहास की प्रमुख घटनाओं में से एक काशी शास्त्रार्थ के 154 वर्ष पूर्ण हो गए। प्राय: लोग आपको स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का विवरण देते है। जब विदेश की धरती पर स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति का परिचय दिया था। मगर उनके भाषण से दशकों पूर्व […]
इन्द्र और कृष्ण का युद्ध* पारिजात-हरण का उल्लेख “भागवत पुराण”, दशम स्कन्ध, उ०, अध्याय ५९, “विष्णुपुराण”, ५।३० में है | जब नरकासुर को मारकर कृष्ण सत्यभामा के साथ द्वारिका लौट रहे थे तो स्वर्ग के नन्दनकानन में खिले पारिजात वृक्ष को देखकर और उसे पाने के लिए लालायित हुई । कृष्ण ने भी अपनी प्रियतमा […]
ऋषि दयानंद जी के विचार।। चारो वेदों को विद्या धर्मयुक्त श्वरप्रणित संहिता मंत्रभाग को निर्भ्रांत स्वतः प्रमाण मानता हूं, अर्थात जो स्वयं प्रमाणरूप हैं, कि जिस के प्रमाण होने में किसी अन्य ग्रन्थ की अपेक्षा न हो जैसे सूर्य वा प्रदीप स्वयं अपने स्वरूप के स्वतः प्रकाश और पृथिव्यादि के प्रकाश होते हैं वैसे चारो […]
(ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की ‘वैदिक संपत्ति’ नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं ] प्रस्तुति: देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन ‘उगता भारत’) गतांक से आगे….. इसके आगे नक्षत्रों का वर्णन इस प्रकार है- यानि नक्षत्राणि दिव्य१न्तरिक्षे अप्सु भूमौ यानि नगेषु दिक्षु । प्रकल्पय श्रवन्द्रमा यान्येति सर्वाणि […]
बिखरे मोती आत्म संतोष कैसे मिले :- ब्रह्मनिष्ठ होकर मिले, आत्मा को संतोष । सिन्धु समाया बिन्धु में, सुख शान्ति का कोय॥2464॥ अहंकारी को स्वर्ग सम्भव नहीं :- सम्भव है सुई नोक से, निकले ॐ की डार । स्वर्ग द्वार पहुँचे नहीं, जिसको हो अहंकार॥2465॥ कस्तूरी की सुगन्ध ज्यों, स्वतः ही प्रकट होय । त्यों […]
-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। यज्ञ वेदों से प्राप्त हुआ एक शब्द है। इसका अर्थ होता है श्रेष्ठ व उत्तम कर्म। श्रेष्ठ कर्म वह होता है जिससे किसी को किसी प्रकार की हानि न हो अपितु दूसरों व स्वयं को भी अनेक लाभ हों। यज्ञ से जैसा लाभ होता है वैसा अन्य किसी कार्य से नहीं […]
भीष्म जी के भीतर अपार धैर्य था । उन्होंने कई प्रकार की पीड़ाओं को सहन करते हुए भी कहीं पर भी असंयत भाषा का प्रयोग नहीं किया । उनकी बात को धृतराष्ट्र ने भी स्वीकार नहीं किया, परंतु इसके उपरान्त भी से उसके प्रति सद्भाव बनाए रखने में सफल रहे। एक प्रकार से उनके भीतर […]
15 नवंबर / पुण्यतिथि शिक्षाधर्मी महात्मा हंसराज डीएवी शिक्षण संस्थान ने देश भर में एक अलग पहचान बनाई है इसका पूरा श्रेय महात्मा हंसराज को जाता है, जिनका योगदान भारतीय समाज में अमूल्य है। इन्होंने शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। विलक्षण प्रतिभा के धनी लाला हंसराज की आरंभिक शिक्षा गांव […]
#डॉविवेकआर्य अतीत पर: 1. अतीत को देखते रहना व्यर्थ है, जबतक उस अतीत पर गर्व करने योग्य भविष्य के निर्माण के लिये कार्य न किया जाय. अधिकार पर: 2. व्यक्ति को सोचने का पूरा अधिकार है, पर उसे सोचे हुए को भाषा में या कार्यरूप में व्यक्त करने की बात हो तो वह अधिकार शर्तों […]