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इतिहास के पन्नों से

आर्यसमाज का सेवक ‘श्री हाजी अल्ला रखीया रहीम तुल्ला’

-प्रियांशु सेठ आर्यसमाज ने विभिन्न सम्प्रदायों के अनुयायियों की शुद्धि कर उन्हें वैदिक धर्म में दीक्षित करके उनपर महान् उपकार किये हैं। ईश्वर के सत्य स्वरूप से परिचित कराकर उसको पाने का वेदोक्त मार्ग बतलाना आर्यसमाज का जन सामान्य पर सबसे बड़ा उपकार है। आर्यसमाज के वेदोक्त विचारों ने जहां अपना प्रभाव सत्यप्रेमी और निष्पक्ष […]

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हरियाणा के कवि सम्राट् — चौ० ईश्वरसिंह जी ‘गहलोत’ 67 वें स्मृति दिवस पर कोटि कोटि नमन

विषय को प्रारम्भ करने से पूर्व मैं आवश्यक समझता हूं कि उस महान् व्यक्ति के बारे में एक वचन अपनी तरफ से कह दूं ” जिस प्रकार पं० बस्तीराम ने ब्राह्मणों की दुर्दशा को देखकर एक अनुपम ढंग से ब्राह्मणों का परिधान बदलकर उनको उनका सत्य रूप दिलवाने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी उसी […]

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अयोध्या का बावला राजकुमार असमनजस

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी राजा सगर संतानहीन थे :- भगवान राम के पूर्वजों में राजा सगर एक महत्त्व पूर्ण राजा हुए थे। राजा सगर की दो पत्नियाँ थीं जिन्होंने अपनी तपस्या से उनके पापों को दूर कर दिया था। उन्हें लंबे समय तक कोई संतान नहीं हुई, इसलिए वे अपनी दोनों पत्नियों के साथ हिमालय […]

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*गौतम बुद्ध के चार आर्य सत्य का विश्लेषण*

Dr DK Garg यधपि गौतम बुद्ध ने चार वेद नहीं पढ़े थे। क्योंकि प्रारम्भ से ही उनके मन में वेद ज्ञान के प्रति भ्रांतिया पैदा कर दी गयी थे। परन्तु गौतम बुद्ध द्वारा जो चार आर्य सत्य बताए है वह चारो वेदो के प्रति उनकी श्रद्धा और इन चार वेदों में मुख्यत क्या है ,ये […]

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आर्यसमाज

लेखक- श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ उन्नीसवीं सदी के हिन्दू नवोत्थान के इतिहास का पृष्ठ-पृष्ठ बतलाता है कि जब यूरोप वाले भारतवर्ष में आये तब यहां के धर्म और संस्कृति पर रूढ़ि की पर्तें जमी हुई थीं एवं यूरोप के मुकाबले में उठने के लिए यह आवश्यक हो गया था कि ये पर्तें एकदम उखाड़ फेंकी […]

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स्वामी दयानंद और स्वामी विवेकानंद

डॉ विवेक आर्य तुलनात्मक अध्ययन कल मैंने स्वामी दयानंद की निर्भीकता को प्रदर्शित करने के लिए एक शंका प्रस्तुत की थी। अनेक मित्रों ने अपने अपने विचार प्रकट किये। सभी का धन्यवाद। मैंने यह प्रश्न क्यों किया? इस पर चर्चा करनी आवश्यक है। दोनों महापुरुषों के विचारों में भारी भेद हैं। इसलिए इस विषय पर […]

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महान पेशवा बाजीराव बल्लाल और आक्रमणकारी अहमदशाह अब्दाली

सन 1757 तुर्क लुटेरा अहमद शाह अब्दाली लूटपाट करता पंजाब में घुसा। आम बाजारों को लूटना, सामान्य जन का सामूहिक कत्लेआम, स्त्रियों बच्चों को गुलाम बनाना तो सामान्य बात थी, पर इसके अतिरिक्त एक और काम हुआ। अमृतसर स्वर्ण मंदिर को अपवित्र कर दिया गया। तालाब में गाय काट कर डाली गई, और मन्दिर पर […]

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इच्छ्वाकु वंश के महान राजा सगर

आचार्य डॉ. राधे श्याम द्विवेदी च्वयन आश्रम पर सगर का जन्म :- अयोध्या के राजा बाहु का राज्य पूर्व में शकों के साथ आए हैहयों और तालजंघों ने छीन लिया था। यवन, पारद, कम्बोज, पहलव (और शक), इन पांच कुलों (राजाओं के) ने हैहयों के लिए और उनकी ओर से हमला किया। शत्रुओं ने बाहु […]

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भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का क्रूर अध्याय है आपातकाल

* (डॉ. मोहन यादव-विनायक फीचर्स) भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल एक काले और क्रूर अध्याय के रूप में है। इस दिन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल के प्रावधानों के तहत हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। भारतीय […]

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अफगानिस्तान का हिंदू वैदिक अतीत: हिन्दू संघ का निर्माता गुर्जर प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम*

भारत एक अध्यात्मवादी राष्ट्र है। इसके बारे में यह भी सत्य है कि हर युग में इसका नेतृत्व अध्यात्मवाद ने ही किया है। भारत की शासन व्यवस्था भी इस बात का स्पष्ट संकेत करती है कि ब्रह्मबल सदा ही क्षात्रबल से पहले पूजनीय है। ब्रह्मबल के बिना कोई भी राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता। यह […]

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