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आज का चिंतन

जीवात्मा का सृष्टिकाल में जन्म-पुनर्जन्म होना सत्य सिद्धान्त है”

ओ३म् ========= हम प्रतिदिन मनुष्य व पशुओं आदि को जन्म लेते हुए देखते हैं। यदि हम इन प्राणियों के जन्मों पर विचार करें तो अनेक प्रश्न उत्पन्न होते हैं जिनके उत्तर हमें साधारणतः नहीं मिलते। मनुष्य व उसके बच्चे का जो शरीर एवं उसमें चेतन जीवात्मा होता है, वह माता के शरीर में कैसे आता […]

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ईश्वर विषय में शंका समाधान

🌷ईश्वर विषय में शंका समाधान🌷 🌻प्रश्न―कुछ लोग कहते हैं कि-ब्रह्मा, शिव देहधारी भी ईश्वर ही थे क्योंकि ब्रह्मा, शिव का कोई भी माता पिता न था। यदि वे ईश्वर न होते तो उनका भी कोई माता पिता अवश्य होता? उत्तर:-ऋषि ब्रह्मा,शिव का माता पिता भी ईश्वर ही था जैसे कि ऋषि अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा, […]

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धर्म और सनातन धर्म: एक विश्लेषण*

Dr D K Garg। कृपया अपने विचार बताये और आगे फॉरवर्ड भी करें ये लेख चार भाग में है ,पहले भाग की प्रस्तुति।🙏 यदि किसी शब्द की परिभाषा में सबसे ज्यादा तुक्केबाजी हुई है तो वह है धर्म,कोई भी अल्प ज्ञानी धर्म क्या है अपने हिसाब से बताना सुरु कर देता है। इस कार्य में […]

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वैदिक गणित में विद्यमान अथाह आधुनिक ज्ञान

केल्कुलेटर व कम्प्यूटर से भी तेज गति से उत्तर देने वाले ‘वैदिक गणित’ के 16 सूत्र काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में वर्ष 1949–50 के ‘कन्वोकेशन वीक’ के दौरान चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम के अवसर पर, पुरी के शंकराचार्य भी वहां उपस्थित थे। वहां उनसे विज्ञान संकाय और अभियांत्रिकी विभाग के छात्रों द्वारा गणित के जटिल से […]

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राम जी का यह देश अजर अमर है……

मैंने अपने शहर को इतना विह्वल कभी नहीं देखा! तीन से चार लाख लोग सड़क किनारे हाथ जोड़े खड़े हैं। अयोध्या में प्रभु की मूर्ति बनाने के लिए नेपाल से शालिग्राम पत्थर जा रहा है, और आज वह ट्रक गोपालगंज से गुजर रहा है। कोई प्रचार नहीं, कोई बुलाहट नहीं, पर सारे लोग निकल आये […]

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ऋषि दयानन्द ने ईश्वरोपासना और अग्निहोत्र का सर्वाधिक प्रचार किया”

ओ३म् ========= ऋषि दयानन्द के प्रादुर्भाव के समय देश विदेश के लोग ईश्वर की सच्ची उपासना के ज्ञान व विधि से अपरिचित थे। यदि कुछ परिचित थे तो वह योगी व कुछ विद्वान धार्मिकजन ही रहे हो सकते हैं। वह लोग उपासना व अग्निहोत्र यज्ञों का प्रचार न कर उसे अपने तक ही सीमित किये […]

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आज का चिंतन

सृष्टि का बनना बिगड़ना व कर्म प्रवाह अनादि है*

प्रस्तुति Dr DK Garg लेखक: देवेंद्र आर्य एडवोकेट पहले अंक में आपको बताया कि ईश्वर ने पहली बार सृष्टि बनाई तो कर्म कहां से आये ? इस लेख में तीन मुख्य बाते थी की ईश्वर ,जीव और प्रकृति हमेशा से है और कभी समाप्त होने वाले नहीं है। प्राकृति की मदद से जीव अपने कर्मो […]

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नफ़रत और अंधविश्वास का जन्म कुरान से हुआ है

नफ़रत और अंधविश्वास का जन्म कुरान से हुआ है मुसलमानों का मानना है कि कुरान लेकिन अल्लाह ने आसमान से भेजी थी , लेकिन यह ऐसी किताब है जिसके आते ही सम्पूर्ण मानव जाति दो भागों में विभाजित हो गई एक तरफ ईमान वाले यानि मुसलमान और दूसरी तरफ गैर मुस्लिम , जिनको कुरान ने […]

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आज का चिंतन धर्म-अध्यात्म

महर्षि दयानंद कृत सत्यार्थ प्रकाश और पंचकोश की अवधारणा

सत्यार्थ प्रकाश के नवम समुल्लास में महर्षि दयानंद ने लिखा है कि सत पुरुषों के संग से विवेक अर्थात सत्य सत्य धर्म- अधर्म कर्तव्य -अकर्तव्य का निश्चय अवश्य करें,पृथक पृथक जानें । जीव पंचकोश का विवेचन करें। पृथम कोष जो पृथ्वी से लेकर अस्थिपर्यंत का समुदाय पृथ्वीमय है उसको अन्नमय कोष कहते हैं ।”प्राण” अर्थात […]

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आज का चिंतन

क्या वेदों में सती प्रथा का विधान है?

#डॉविवेकआर्य 1875 में स्वामी दयानंद ने पूना में दिए गए अपने प्रवचन में स्पष्ट घोषणा की – “सती होने के लिए वेद की आज्ञा नहीं है” सायण ने अथर्ववेद 19/3/1 के मंत्र में सती प्रथा दर्शाने का प्रयास किया है – यह नारी अनादी शिष्टाचार सिद्ध, स्मृति पुराण आदि में प्रसिद्द सहमरण रूप धर्म का […]

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