आजादी के पचहत्तर साल बाद भी असत्य, अनर्गल, अर्थहीन और असंवैधानिक भाषा बोलने वाले नेताओं की कमी नहीं है ! इन अल्पमति, अज्ञानी, बेईल्म, अल्पबुद्धि, जाहिल, मंदबुद्धि और विवेक शुन्य राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा बारंबार “संविधान खतरे में है”? बोलना संविधान संशोधन की अधूरी जानकारी के सिवाय और कुछ नहीं ! अस्सी के दशक […]