शोकों से तरणा तुझे, प्रभु -मिलन की चाह । माया के फंसा भवॅर में, भूला अपनी रहा॥1899॥ शेर ख़ुदा जब किसी को बढ़ाना चाहता है , तो उसकी शख्सियत में नायब हुनर देता है । अपने तो क्या गैर भी तारीफ करते है, ज़माना नाज़ करता है॥1900॥ पद की शोभा शख्सियत, हाथ की शोभा दान […]
बिखरे मोती : मानव – जीवन का उद्देश्य:-