🇮🇳मुहब्बत की नकली दूकान 🇮🇳 घर में खाता घर में पीता घर में सोता है। घर वालों पर ही भोंके जब बाहर होता है। अनुचित अनपेक्षित अभद्र अपशिष्ट परोस रहा, जब से राजनीति में एक गधे को जोता है। तिलक जनेऊ धोती कुर्ता धारे पाखण्डी, दाढ़ी बढ़ा कटा लेता कटवे का पोता है। निन्दा करता […]
मुहब्बत की नकली दुकान