Categories
इतिहास के पन्नों से हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

श्यामजी कृष्ण वर्मा और लंदन में क्रांतिकारियों का गुरुकुल

लेखक :-स्वामी ओमानन्द सरस्वती प्रस्तुति :- अमित सिवाहा महर्षि दयानन्द के प्रियतम शिष्य श्री श्याम जी कृष्ण वर्मा काठियावाड़ राज्य के थे। ये संस्कृत भाषा के धुरन्धर विद्वान थे। महर्षि दयानन्द जी से अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण को पढ़ा था। महर्षि दयानन्द ने विदेशों में वैदिक धर्म के प्रचारार्थ हो लन्दन भेजा था। महर्षि दयानन्द के […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

महाशय राजपाल और इतिहास की एक अविस्मरणीय दुर्घटना

इतिहास की एक अविस्मरणीय दुर्घटना: १९२० में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो पुस्तकें वितरित की जाने लगी! एक पुस्तक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी”, और दूसरी पुस्तक का नाम था “उन्नीसवीं सदी का लंपट महर्षि”! ये दोनों पुस्तकें “अनाम” थीं! इसमें किसी लेखक या प्रकाशक का नाम नहीं था, और […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

अभिमन्यु की मृत देह को जयद्रथ ने लात नहीं मारी थी, तो फिर क्या हुआ था ….?

  अपने ज्येष्ठ पिताश्री धर्मराज युधिष्ठिर और अन्य पांडवों के आग्रह और आदेश को स्वीकार कर अभिमन्यु ने भयंकर युद्ध करना आरंभ किया। वह जिधर भी निकलता उधर ही कौरव दल में हड़कंप मच जाता। उसका साहस और उसकी वीरता आज देखने लायक थी। आज दैवीय शक्तियां भी अभिमन्यु की वीरता और युद्ध कौशल को […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

अभिमन्यु के बारे में भ्रांतियां और महाभारत : चक्रव्यूह को तोड़ने का ज्ञान अभिमन्यु को गर्भ में नहीं हुआ था तो फिर….

  महाभारत के संबंध में ऐसी अनेकों भ्रांतियां हैं जो मूल महाभारत में किसी और प्रकार से वर्णित की गई हैं और समाज में किसी और प्रकार से उनके बारे में भ्रांतियां पैदा कर ली गई हैं। अभिमन्यु के बारे में भी कई प्रकार की भ्रांतियां हैं :- जैसे चक्रव्यूह तोड़ने के लिए उसने स्वयं […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

महाभारत को समझने देखने और नजरिया बदलने की आवश्यकता है

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ इनामी एंकर व्यथित थे। आज उन्होंने स्क्रीन काली नहीं की थी बल्कि अपने काले से कोट में आम जनता के लिए काम करने की अपनी छवि को बरकरार रखते हुए वो खुद कैमरे के सामने प्रकट हुए थे। समझ लीजिये कि आजकल ख़बरों का अकाल है… उन्होंने कहना शुरू किया। आखिर कैसे किसी वृन्दावन […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

भगवान श्री शंकराचार्य का काल निर्धारण और पश्चिमी विद्वानों का घोटाला

पाश्चात्य और कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने इतनी गड़बड़ की है कि विवेकवान लोग भी भ्रमित हो जाएं जगद्गुरु भगवान आद्यशंकराचार्य के जन्म पर भी यही भ्रम हैं के जबकि शांकरपीठ की चारों पीठ की अविछिन्न परंपरा इतिहास दस्तावेज साफ बताते हैं कि उनको 2500 वर्ष हो चुके हैं जबकि यह लोग 1200 साल में अटाना चाहते […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

क्या सांख्यकार कपिल मुनि अनीश्रवादी थे ?

लेखक- स्वामी धर्मानन्द प्रस्तुति- प्रियांशु सेठ माननीय डॉ० अम्बेदकरजी से गत २७ फर्वरी को मेरी जब उनकी कोठी पर बातचीत हुई तो उन्होंने यह भी कहा कि सांख्यदर्शन में ईश्वरवाद का खण्डन किया गया है। यही बात अन्य भी अनेक लेखकों ने लिखी है किन्तु वस्तुतः यह अशुद्ध है। सांख्य दर्शन में ईश्वर के सृष्टि […]

Categories
इतिहास के पन्नों से संपादकीय

दुर्योधन क्यों हारा ?

दुर्योधन क्यों हारा? ‘दुर्योधन’ और ‘युधिष्ठिर’ दोनों ही नामों में ‘युद्ध’ शब्द आता है। ‘दुर्योधन’ वह है जो बुरी तरह से युद्ध करता है अर्थात जीवन के समर क्षेत्र में युद्ध जीतने के लिए नैतिक – अनैतिक किसी भी प्रकार के आचरण को करने के लिए सदैव तत्पर रहता है। जबकि ‘युधिष्ठिर वह है जो […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि इतिहास के आईने में

    रवि वैश्य मथुरा स्थित कृष्ण जन्म भूमि एक प्रमुख धार्मिक स्थान है जहाँ हिन्दू धर्म के अनुयायी कृष्ण भगवान का जन्म स्थान मानते हैं वहीं इससे लगी हुई जामा मस्जिद भी है,जानें यहां का इतिहास। कृष्ण जन्म भूमि मथुरा का एक प्रमुख धार्मिक स्थान है जहाँ हिन्दू धर्म के अनुयायी कृष्ण भगवान का […]

Categories
आतंकवाद इतिहास के पन्नों से भयानक राजनीतिक षडयंत्र

भारत के मार्क्सवादी इतिहासकारों के बौद्धिक घोटाले अर्थात इतिहास की हत्या, भाग – 3

  हिंदू लोग, विशेषकर हिंदू बुद्धिजीवी वर्ग, अपने पर हो रहे चहुंमुखी बौद्धिक हमलों के विरुद्ध किसी ठोस वैचारिक अभियान चलाने या बौद्धिक हमलों का बौद्धिक प्रत्युत्तर देने में प्रायः निष्क्रिय रहा है. स्वयं के विरुद्ध किए गए किसी के मनगढंत दावे, विवरण या सफेद जूठ को देखकर भी उसे हल्के में लेकर इग्नोर कर […]

Exit mobile version