एक दिव्य जीवन कैसे बना जाये? एक दिव्य जीवन शत्रुता रहित कैसे होता है? एभिर्द्युभिः सुमना एभिरिन्दुभिर्निरुन्धानोअमतिंगोभिरश्विना। इन्द्रेणदस्युंदरयन्तइन्दुभिर्युतद्वेषसः समिषारभेमहि।। ऋग्वेदमन्त्र 1.53.4 (एभिः) इसके साथ (द्युभिः) प्रकाशित करने वाला ज्ञान (सुमनः) महान्, पवित्र तथा दिव्य मन बनो (एभिः) इनके साथ (इन्दुभिः) महान् गुणों के साथ (निरुन्धानः) रोक दो, बाधित करो (अमतिम्) अज्ञानता आदि (गोभिः) गाय आदि, […]
अज्ञानता का नाश कैसे किया जाये?