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आज का चिंतन

“देश में जन्मना जाति व्यवस्था लगभग 1350 वर्ष पूर्व आरम्भ हुई”

ओ३म् ========= वेद मनुष्य के गुण, कर्म व स्वभाव को महत्व देते हैं। जो मनुष्य श्रेष्ठ गुण, कर्म व स्वभाव वाला है वह द्विज और गुण रहित व अल्पगुणों वाला है उसे शूद्र कहा जाता है। द्विज ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य को कहते हैं जो गुण, कर्म व स्वभाव की उत्तमता से होते हैं। ब्राह्मण […]

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आज का चिंतन

क्‍या आप जानते हैं अपनी छाया को ?

हमारे शरीर की अपनी छाया होती है और अपने आसपास बनी रहती है। प्रकाश होने पर भूतल पर तो छाया होती है ही, किंतु वह परछाई होती है और जो शरीर के चतुर्दिक ध्‍यानपूर्वक अवलोकित होती है, वह छाया है। इसको ‘प्रभामण्‍डल’ कहा जा सकता है। आज की भाषा में ओरा। इसका कदाचित पहला शास्‍त्रीय […]

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आज का चिंतन

होश आने पर आदमी पछताता है अपने किए गए कर्मो पर : स्वामी विवेकानंद

प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्न रहना चाहता है। बचपन और जवानी में तो वह पढ़ाई लिखाई खेलकूद नौकरी व्यापार इत्यादि अपने लौकिक कामों में ही उलझा रहता है। और उसी में असली सुख समझता है। “परन्तु जब प्रौढ़ावस्था आती है, अर्थात जब उम्र 40 वर्ष के आसपास या उससे अधिक हो जाती है, तब उसे जीवन जीने […]

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इतिहास के पन्नों से

राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा की कांग्रेस के इतिहास का काला सच भाग – 5

आठवां प्रश्न मूल संविधान में सेकुलर शब्द नहीं था। इंदिरा गांधी ने इस शब्द को भारत के संविधान में 1976 में संविधान के 42 वें संशोधन के अंतर्गत स्थापित किया। इस शब्द का अर्थ हिंदी में यदि पंथनिरपेक्ष रखा गया होता तो बहुत ही अच्छा होता परंतु कांग्रेसियों ने इसका अर्थ धर्मनिरपेक्ष कर दिया। जिस […]

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आज का चिंतन

आर्य समाज की श्री कृष्ण जी के बारे में मान्यता

श्री कृष्ण और आर्यसमाज #डॉ_विवेक_आर्य लाला लाजपत राय ने अपने श्रीकृष्णचरित में श्रीकृष्ण के सम्बन्ध में एक बड़ी विचारणीय बात लिखी है- “संसार में महापुरुषों पर उनके विरोधियों ने अत्याचार किये,परन्तु श्रीकृष्ण एक ऐसे महापुरुष हैं जिन पर उनके भक्तों ने ही बड़े लांछन लगाये हैं।श्रीकृष्णजी भक्तों के अत्याचार के शिकार हुए हैं व हो […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

जब मालवीय जी ने डाली थी भगत सिंह की फांसी रोकने की याचिका

*किताबों को खंगालने से हमें यह पता चला* कि ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय‘ (BHU) के संस्थापक *पंडित मदनमोहन मालवीय जी* नें 14 फ़रवरी 1931 को Lord Irwin के सामने *भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव* की फांसी रोकने के लिए Mercy Petition दायर की थी ताकि उन्हें फांसी न दी जाये और कुछ सजा भी कम की […]

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कविता

गीता मेरे गीतों में , गीत 35 ( गीता के मूल ७० श्लोकों का काव्यानुवाद)

ईश्वर की सर्वव्यापकता जीवन झोपड़ी जल रही उजड़ रहे हैं सांस। खांडव वन में पक्षीगण करते शोक विलाप ।। चला चली यहां लग रही गए रंक और भूप। समय पड़े तुझे जावणा मिट जावें रंग रूप ।। वह भीतर बैठा कह रहा , क्यों होता बेचैन ? धन – वैभव को भूलकर मुझे भजो दिन […]

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इतिहास के पन्नों से

काल का अतिक्रमण कोई नहीं कर सकता

“भूत का, भवत् का, भविष्यत् का सब ब्रह्माण्ड, इस ब्रह्माण्ड की सब अनगिनत वस्तुएँ, काल में ही यथास्थान रखी हुई हैं। काल का अतिक्रमण कोई नहीं कर सकता।” ***** काले तपः काले ज्येष्ठं काले ब्रह्म समाहितम्। कालो ह सर्वस्येश्वरो यः पितासीत् प्रजापतेः॥ –अथर्व०१६।५३।८ ऋषिः – भृगुः। देवता – कालः। छन्दः – अनुष्टुप्। विनय – हरेक […]

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महत्वपूर्ण लेख

योगीराज श्री कृष्ण की उपासना विधि

लेखक- श्री पं० बिहारीलाल जी शास्त्री प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ प्रायः महापुरुषों के तीन रूप हुआ करते हैं। लोक रञ्जक रुप, यथा श्री कृष्ण जी की वृन्दावन की लीलाएं इस रूप का, शस्त्र होता है- वंशी। दूसरा रूप होता है लोक शिक्षक रूप, यथा महाभारत युद्ध में गीतोपदेश तथा उधव को धर्मोपदेश। इस रूप में शंख […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

स्वतंत्रता संग्राम के अज्ञात सेनापति डॉक्टर हेडगेवार के साथ इतिहासिक अन्याय क्यों ?

अमृत महोत्सव लेखमाला सशस्त्र क्रांति के स्वर्णिम पृष्ठ — भाग-18 (अंतिम) – नरेन्द्र सहगल – चिर सनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे जिन्होंने अपने तथा अपने संगठन के नाम से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना तन मन सब […]

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