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इतिहास के पन्नों से

विदुषी भारतीय ज्योतिषज्ञ महिला खना ’

ओ३म् ‘विदुषी भारतीय ज्योतिषज्ञ महिला खना ’ –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।   गणित में लीलावती एवं ज्योतिष में खना का नाम बहुत प्रसिद्ध है। विदुषी खना लंका द्वीप के एक ज्योतिषी की कन्या थी। सातवीं या आठवीं सदी की बात है। उज्जयिनी में महाराज विक्रम का राज्य था। उसके दरबार में बड़े–बड़े कलाकार, कवि, पण्डित, […]

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कविता

गीत : ‘राम आए हैं’

    राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं। राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं।     तम घोर था निराशा का दीप बुझा था आशा का अब देखो चहुँ ओर सब […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

महात्मा मुंशीराम जी की गुरुकुल कांगड़ी से जुदाई*

  पंडित सत्यदेव विद्यालंकार महात्मा मुंशीराम जी [बाद में स्वामी श्रद्धानंद जी] आपस के संघर्ष को टालने में सदा चतुराई से काम लिया करते थे। गुरुकुल को संस्कृत की पाठशाला बनाने किंवा विश्वविद्यालय बनाने का मतभेद दिन-पर-दिन जोर पकड़ता गया। यदि महात्मा जी गुरुकुल में बने रहते तो संभव था कि वह मतभेद संघर्ष में […]

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कविता

हूँ घिरा कब से हुआ, अज्ञान के अँधियार में

आशीर्वाद दीजिए 🙏😊🙏 हूँ घिरा कब से हुआ, अज्ञान के अँधियार में कोई तो दिखलाए राह, बस हूँ इसी विचार में सारी उम्र वन में उस, मृग की भांति ही फिरा ढूँढता बाहर मगर जो, खुद की महक से था घिरा तूने सब, पाने की हमेशा, बाहर से ही आस की मन में कभी सोचा […]

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विविधा

बिहार में लागू ‘प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना’ देश के लिए बनी नजीर 

– मुरली मनोहर श्रीवास्तव                      वर्ष 2005 से पहले बिहार को लालटेन युग से जाना जाता था। यहां पर बिजली की खास्ता हालत थी। गांव की बात छोड़िए, शहर में 24 घंटे लोग बिजली के लिए तरसते थे लेकिन वर्ष 2005 में श्री नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद धीरे-धीरे ही सही बिहार में बिजली की स्थिति में सुधार देखने को मिलने […]

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समाज हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

महर्षि दयानन्द जी का स्वकथित जीवनचरित्र, भाग 4

कुछ दिन पीछे मैंने कहा कि आप ने काशी जाने से रोका, इसमें मेरा कुछ आग्रह नहीं परन्तु यहां से तीन कोस पर अमुक ग्राम में जो बड़े वृद्ध और अपनी जाति के भारी विद्वान् रहते हैं और वहां हमारे घर की जमींदारी भी है, उनके पास जाकर पढ़ा करूं, इतना तो मान लीजिये । […]

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महत्वपूर्ण लेख

शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी दौर से गुज़रता बिहार

फूलदेव पटेल मुजफ्फरपुर, बिहार सदियों से यह माना गया है कि शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है. मानव सभ्यता का अस्तित्व शिक्षा से ही जुड़ा हुआ है. हमारी सभ्यता व संस्कृति का विकास भी मानव की जिज्ञासा, ज्ञान की चाह तथा विभिन्न नवीन कौशलों को जानने की ललक के कारण ही नित्य नवीन […]

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आज का चिंतन

प्राण हमारे अन्दर आनन्द कब पैदा करते है?

प्राण हमारे अन्दर आनन्द कब पैदा करते है? हृदय में परमात्मा को स्थापित करने के दो प्रधान कारण कौन से हैं? जीवन में प्रगति का क्रम क्या है? बृहत्स्वश्चन्द्रममवद्यदुक्थ्य1मकृण्वतभियसारोहणंदिवः। यन्मानुषप्रधनाइन्द्रमूतयः स्वर्नृषाचोमरुतोऽमदन्ननु।। ऋग्वेद 1.52.9 (बृहत्) बड़ा (स्वश्चन्द्रम्) आत्म प्रकाश के साथ (अमवत्) उत्तम ज्ञान, उत्तम मन (यत्) जब (उक्थ्यम्) प्रशंसनीय (परमात्मा) (अकृण्वत्) स्थापित (हृदय में) (भियसा) […]

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आर्थिकी/व्यापार

भारत में तृतीय तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर ने चौंकाया है

  वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर ने भारत सहित विश्व के समस्त आर्थिक विश्लेशकों को चौंका दिया है। इस दौरान, भारत में सकल घरेलू उत्पाद में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हासिल हुई है जबकि प्रथम तिमाही के दौरान वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत एवं द्वितीय तिमाही के दौरान 7.6 प्रतिशत की रही थी। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही थी। साथ ही, क्रेडिट रेटिंग संस्थान इकरा ने इस वर्ष तृतीय तिमाही में 6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान एवं भारतीय स्टेट बैंक ने भी 6.9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था। कुल मिलाकर, लगभग समस्त वित्तीय संस्थानों के अनुमानों को झुठलाते हुए सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत की रही है। हम सभी के लिए हर्ष का विषय तो यह है कि विनिर्माण इकाईयों की वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही में 11.6 प्रतिशत हो गई है तथा निर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत की रही है। साथ ही, खनन के क्षेत्र में वृद्धि दर 1.4 प्रतिशत से बढ़कर 7.5 प्रतिशत की रही है। यह तीनों ही क्षेत्र रोजगार सृजन के क्षेत्र माने जाते हैं। अतः देश में अब रोजगार के नए अवसर भी निर्मित हो रहे हैं। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाईयों में वृद्धि दर आकर्षक रही है। कृषि का क्षेत्र जरूर, विपरीत मानसून एवं अल नीनो के प्रभाव के चलते, विपरीत रूप से प्रभावित हुआ है एवं कृषि के क्षेत्र में वृद्धि दर 0.2 प्रतिशत  ऋणात्मक रही है। हालांकि वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2022-23 तक कृषि के क्षेत्र में औसत वृद्धि दर 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष से अधिक की रही है। परंतु, प्रकृति के आगे तो किसी की चलती नहीं है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के तृतीय तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद के विशेष रूप से उद्योग क्षेत्र एवं सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर के आंकड़ों को देखकर तो अब यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि भारत आगे आने वाले वर्षों में 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष की विकास दर हासिल करने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है एवं अगले लगभग 4 साल के अंदर ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, वर्तमान में भारत विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। साथ ही, भारतीय शेयर बाजार भी बाजार पूंजीकरण के मामले में वर्तमान में विश्व में चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा। क्योंकि, भारत में आर्थिक विकास की तीव्र गति को देखते हुए विदेशी निवेशक एवं विदेशी निवेश संस्थान, दोनों ही भारतीय पूंजी बाजार में अपने निवेश को निश्चित ही बढ़ाएंगे। भारत में वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही में अनुमानों से कहीं अधिक वृद्धि दर हासिल करने के पीछे दरअसल हाल ही के समय में आर्थिक क्षेत्र के साथ साथ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्रों में हो रहे परिवर्तन भी मुख्य भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं, इस ओर सामान्यतः विदेशी अर्थशास्त्रियों एवं वित्तीय संस्थानों का ध्यान शायद नहीं जा रहा है। हाल ही के समय में भारत में अब विभिन्न त्यौहार अत्यधिक उत्साह के साथ मनाए जा रहे हैं। इन त्यौहारों के मौसम एवं शादियों के मौसम में भारतीय परिवारों, विशेष रूप से मध्यम वर्गीय एवं उच्च वर्गीय परिवारों  के खर्च में अपार वृद्धि हो रही है। इस खर्च का पूरा पैसा भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रहा है, जिससे आर्थिक वृद्धि दर में तेजी दिखाई देने लगी है। वर्ष 2023 में दीपावली त्यौहार के दौरान लगभग 4 लाख करोड़ रुपए की राशि भारतीय परिवारों द्वारा खर्च की गई थी। शादियों के दौरान भारतीय परिवारों द्वारा अतिरिक्त खर्च किया जाना भी केवल भारत की ही विशेषता है, अन्य देशों में शादियों के दौरान इस प्रकार के खर्च नहीं होते हैं। दूसरे, भारत में हाल ही के समय में धार्मिक पर्यटन में अपार वृद्धि देखने में आई है, क्योंकि इन क्षेत्रों की आधारभूत संरचना में आमूल चूल सुधार हुआ है। पर्यटन के बढ़ने से न केवल रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित हो रहे हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी अपार बल मिल रहा है। अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन, हरिद्वार, वृंदावन आदि धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की अपार वृद्धि दिखाई दे रही है। अयोध्या में तो प्रभु श्रीराम के मंदिर के शिलान्यास के बाद से लगातार औसतन प्रतिदिन 2 लाख से अधिक पर्यटक अयोध्या पहुंच रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक क्षेत्र में लगातार किए जा रहे सुधारों के चलते एवं पूंजीगत खर्च में लगातार की जा रही बढ़ौतरी से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार द्वारा 10 लाख करोड़ रुपए की राशि इस मद पर खर्च की गई है जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस मद पर 7.5 लाख करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई थी। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में पूंजीगत खर्च की राशि को बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। दूसरे, भारत में कर (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) के संग्रहण में भी अपार सुधार दिखाई दे रहा है। कर ढांचे को आसान बनाकर सम्बंधित नियमों के अनुपालन में सुधार कर, कर संग्रहण में 20 प्रतिशत के आसपास की वृद्धि हासिल की गई है। देश में अनौपचारिक क्षेत्र भी तेजी से औपचारिक क्षेत्र में बदल रहा है, इससे कर संग्रहण के साथ साथ रोजगार के अवसर भी औपचारिक क्षेत्र में अधिक निर्मित हो रहे हैं तथा विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलते दिखाई दे रहे है। विशेष रूप से कोरोना महामारी के खंडकाल के बाद से (वित्तीय वर्ष 2022 से वित्तीय वर्ष 2024 के बीच) भारत में औसत प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में 38,257 रुपए की वृद्धि दर्ज हुई है एवं अब यह प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपए को पार कर गई है। इस दौरान प्रति व्यक्ति बचत एवं पूंजी निर्माण में भी वृद्धि दृष्टिगोचर है। भारत में सकल बचत की दर वित्तीय वर्ष 2023 में 30.2 प्रतिशत से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024 में 32.3 प्रतिशत से अधिक रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है, जो वित्तीय वर्ष 2014 के बाद से सबसे अधिक दर रहने वाली है। अब देश में पूंजी का उपयोग अधिक दक्षता के साथ किया जा रहा है। जिससे क्रमिक पूंजी-उत्पाद अनुपात में पर्याप्त सुधार हुआ है। यह अनुपात दर्शाता है कि अतिरिक्त उत्पाद के निर्माण में कितनी अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होने वाली है। वित्तीय वर्ष 2012 में क्रमिक पूंजी-उत्पाद अनुपात 7.5 प्रतिशत था जो वित्तीय वर्ष 2023 में घटकर 4.4 प्रतिशत हो गया है। अतः देश में वर्तमान बचत दर को देखते हुए भारत आसानी से 8 प्रतिशत प्रति वर्ष की विकास दर हासिल कर सकता है। कुल मिलाकर, अब भारतीयों को आर्थिक क्षेत्र में लगातार अच्छे समाचार मिलने लगे हैं क्योंकि भारत रोजाना किसी न किसी क्षेत्र में नित नए रिकार्ड बनाता दिखाई दे रहा है। इस प्रकार, अब भारतीयों को नित नए रिकार्ड सुनने की आदत बना लेनी चाहिए। प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

वीर सावरकर की माफ़ी और अंग्रेज

डॉविवेकआर्य (26 फरवरी को पुण्य तिथि के उपलक्ष पर प्रचारित) वीर सावरकर भारत देश के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। कांग्रेस राज की बात है। मणिशंकर अय्यर ने मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा देने के लिए अण्डेमान स्थित सेलुलर जेल से वीर सावरकर के स्मृति चिन्हों को हटवा दिया। यहाँ तक उन्हें अंग्रेजों से माफ़ी […]

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