बालक ने कहा कि नदियों का प्रभाव सदा आगे की ओर ही बढ़ता है। वह कभी पीछे की ओर नहीं लौटता । उसकी निरंतर साधना का राज आगे बढ़ने में छिपा है। इसी प्रकार रात और दिन भी मनुष्य की आयु का अपहरण करके मानो उसे खाते जा रहे हैं। यह बार-बार आ रहे हैं […]
बालक ने कहा कि नदियों का प्रभाव सदा आगे की ओर ही बढ़ता है। वह कभी पीछे की ओर नहीं लौटता । उसकी निरंतर साधना का राज आगे बढ़ने में छिपा है। इसी प्रकार रात और दिन भी मनुष्य की आयु का अपहरण करके मानो उसे खाते जा रहे हैं। यह बार-बार आ रहे हैं […]
आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी ऋषिकेश उत्तरखण्ड के देहरादून ज़िले में देहरादून के निकट एक नगर है। यह गंगा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है और हिन्दुओं का एक तीर्थस्थल है, जहाँ प्राचीन सन्त उच्च ज्ञानान्वेषण में यहाँ ध्यान करते थे।नदी के किनारे कई मन्दिर और आश्रम बने हुए हैं। इसे “गढ़वाल हिमालय का […]
संसार में तन मन धन से सुखी कौन नहीं रहना चाहता? सभी चाहते हैं। परंतु यह बात भी प्रसिद्ध है, कि “कर्म किए बिना फल नहीं मिलता।” “इसलिए जो लोग सुखी रहना चाहते हैं, उन्हें कुछ न कुछ कर्म तो करना ही पड़ेगा, तभी उनकी इच्छा पूरी हो पाएगी।” “तो यदि आप तन से सुखी […]
# बहुत आक्रमणों को झेला हमने, एक के बाद एक। करते रहे संघर्ष पर हार कभी नहीं मानी। मिश्र, फारस, यूनान, रोम, स्केंडनेविया… सभी की संस्कृति का विनाश हुआ पर हिंदू अड़े रहे, लड़ते पिटते, हारते, जीतते… पर अड़े रहे। कैसे? कहाँ से आई इतनी #जिजीविषा? क्या केवल #योद्धाओंकासंघर्ष? अगर संघर्ष केवल योद्धाओं का था […]
आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी उत्तराखंड की तीर्थ और योगनगरी ऋषिकेश सतयुग से ही ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है. यहां स्थित प्राचीन श्री भरत मंदिर में रैभ्य ऋषि और सोम ऋषि ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए तपस्या की थी. भगवान नारायण ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे।ऋषिकेश को “ […]
( भीष्म ने युधिष्ठिर के लिए प्राचीन काल के अनेक ऐतिहासिक प्रसंगों और संवादों को बड़ी सहज और सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। ऐसा करने के पीछे उनका उद्देश्य केवल एक ही था कि उनका प्रिय धर्मराज युधिष्ठिर प्रजा पर शासन करते हुए धर्म, न्याय और नीति के अनुसार आचरण करे। यद्यपि […]
( धर्मराज युधिष्ठिर भीष्म पितामह के दीर्घकालिक अनुभवों के मोतियों को बातों – बातों में ज्ञानोपदेश के माध्यम से लूट रहे थे। यह एक अद्भुत और दुर्लभ वार्तालाप है। ज्ञान मोतियों को लूटने की बड़ी भयंकर डकैती थी यह। सचमुच , एक ऐसी डकैती जिस पर प्रत्येक राष्ट्रवासी को गर्व की अनुभूति होती है। संसार […]
चित्रकूट। अंतर्राष्ट्रीय इतिहासकार सम्मेलन के दूसरे सत्र में डॉ कुसुमलता केडिया और डॉ राकेश आर्य के साथ वैद्य राजेश कपूर का उद्बोधन सुनकर लोगो ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। डॉ कुसुम लता केडिया ने दर्जन भर किताबों और विविध आख्यानों के साथ ही इस बात को सिद्ध किया कि पश्चिमपरस्त इतिहासकारों ने मनगढंत तथ्यों […]
अशोक विहार ( नई दिल्ली ) यहां स्थित आर्य समाज मंदिर अशोक विहार फेस 3 का वार्षिक सम्मेलन बड़े हर्ष और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि […]
अब हम इस अध्याय में उन 16 संस्कारों का संक्षिप्त विवरण देंगे जो भारत की अथवा हिंदुत्व की चेतना के मूल स्वरों में सम्मिलित हैं । अध्ययन की सुविधा के लिए हमने इन 16 संस्कारों को दो भागों में विभक्त कर लिया है । पहले अध्याय में हम पहले 8 संस्कारों के बारे में तो […]