Categories
राजनीति

कोर्ट के सुझाव पर अब तो बने बात

हृदयनारायण दीक्षित सभ्यता देह है और संवाद प्राण। दुनिया की सभी सभ्यताओं का विकास सतत संवाद से हुआ है। भारतीय संस्कृति में आस्था से भी संवाद की परंपरा है। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद को परस्पर संवाद से हल करने का सुझाव दिया है। न्यायालय ने अयोध्या विवाद को संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा बताया […]

Categories
पर्यावरण

एटमी संयंत्रों की सुरक्षा का सवाल

अरविंद कुमार सिंह पिछले दिनों परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में भारत के परमाणु वैज्ञानिकों के इस दावे पर– कि हमारे यहां किसी भी परमाणु हादसे की आशंका बेहद कम है और देश के परमाणु रिएक्टर बेहद सुरक्षित हैं– भरोसा करना इसलिए कठिन है […]

Categories
संपादकीय

सर्वधर्म-समभाव का भ्रम-3

सर्वधर्म–समभाव का भ्रम-3 राकेश कुमार आर्य हमें चाहिए कि हम धर्म के वास्तविक अर्थों को समझें, ग्रहण करें और मानवीय समाज के शत्रु संप्रदायों के दानवी स्वरूप को त्यागें। किसी भी मजहब अथवा संप्रदाय की धर्म पुस्तकों की उन व्यर्थ बातों को भूलने और मिटाने का संकल्प लें जो सृष्टिïक्रम और विज्ञान के सिद्घांतों के […]

Categories
बिखरे मोती

आत्मा के तीन बंधन:भय, भ्रम और भोग

बिखरे मोती-भाग 111 बंधन जग में तीन हैं, भय भ्रम और हैं भोग। इनसे मुक्ति तब मिलै, जब हरि से हो योग ।। 969।। व्याख्या:- इस परिवर्तनशील संसार में जीवात्मा तीन बंधनों भय, भ्रम और भोग में आबद्घ है। जीवात्मा के चारों तरफ ऐसी मोटी पर्तें हैं जो फौलाद से भी कई गुणा अधिक कठोर […]

Categories
बिखरे मोती

ज्ञानी के क्षण बोलते, शास्त्र-ज्ञान और मोद

बिखरे मोती-भाग 110 यदि मैं मेरे को जानता, तो भक्ति में हो लीन। उर में ऐसी तड़प हो, जैसे जल बिन मीन ।। 966।। व्याख्या :- जो लोग ‘मैं’ आत्मा ‘मेरे’ परमात्मा को जानना चाहते हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि शरीर के प्रपंच के पीछे जीवात्मा ही सार वस्तु है, संसार के प्रपंच […]

Categories
बिखरे मोती

मृत्यु के भारी भंवर, कोई न बचने पाय

बिखरे मोती-भाग 108 काल के प्रवाह में, हर कोई बहता जाए। मृत्यु के भारी भंवर, कोई न बचने पाय ।। 960।। व्याख्या :- जिस प्रकार सरिता का जल समुद्र की तरफ प्रवाहित रहता है, ठीक इसी प्रकार इस समष्टि में जड़-चेतन सभी मृत्यु की तरफ बहते जा रहे हैं। इस संदर्भ में श्वेताश्वतर उपनिषद का […]

Categories
बिखरे मोती

मन पर पावै जो विजय, वह वीरों का भी वीर

बिखरे मोती-भाग 103 मद में हो मगरूर नर, करता है अन्याय। अहंकार आंसू बनै, जब हो प्रभु का न्याय ।। 946।। व्याख्या :- इस संसार में धन, यौवन अथवा पद के कारण अहंकार में चूर होकर जब व्यक्ति किसी को अपमानित करता है, अन्याय करता है अथवा उसकी अंतरात्मा को सताता है तो आक्रोष्टा के […]

Categories
बिखरे मोती

सत्गुरू मिलै भक्ति जगै, जग में दुर्लभ होय

बिखरे मोती-भाग 102 जितने भी संयोग हैं, उतने ही हैं वियोग। अटल सत्य संसार का, मत लगा चिंता रोग ।। 943।। व्याख्या :- हमारे वेदों ने हमें जाग्रत पुरूष की तरह जिंदगी जीने के लिए प्रेरित किया है, किंतु इस संसार में अधिकांशत: मनुष्य आधी अधूरी जिंदगी जीते हैं। बेशक ऐसे व्यक्ति यज्ञ, सत्संग अथवा […]

Categories
बिखरे मोती

पुण्यात्मा का मन सदा, हरि में रूचि दिखाय

बिखरे मोती-भाग 101 धन के संग में धर्म भी, ज्यों-ज्यों बढ़ता जाए। मन हटै संसार से, प्रभु चरणों में लगाय ।। 938 ।। व्याख्या :- इस नश्वर संसार में मनुष्य की धन दौलत जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, यदि उसी अनुपात में दान पुण्य अथवा भक्ति और धर्म के कार्यों में रूचि बढ़ती है, तो मन […]

Categories
बिखरे मोती

कोयला हीरा एक है, किंतु भिन्न है मोल

बिखरे मोती-भाग 100 भौतिकता में मन फंसा, क्या जाने मैं कौन? नशा विकारों का चढ़ा, चेतन कर दिया मौन ।। 934 ।। व्याख्या :- इस संसार में ऐसे भी लोग हैं जो तन से तो मनुष्य हैं किंतु मन में पाशविकता इतनी भरी पड़ी है कि वे राक्षस और पिशाच की श्रेणी में आते हैं। […]

Exit mobile version