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संपादकीय

मॉरीशस की “कश्मीर समस्या” और भारत का दृष्टिकोण

अंग्रेजों का यह इतिहास रहा है कि उन्होंने अपनी कुटिलता का प्रयोग करते हुए अपने प्रत्येक उपनिवेश को छोड़ते समय या तो उसका विभाजन किया या उसमें ऐसी कोई स्थानीय समस्या खड़ी की, जो उस देश के लिए आज तक जी का जंजाल बनी हुई है। भारत छोड़ते समय अंग्रेजों ने न केवल भारत का […]

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संपादकीय

25 जून अब संविधान हत्या दिवस

अभी हाल ही में संपन्न हुए 18वीं लोकसभा के चुनावों के समय कांग्रेस के नेता राहुल गांधी अक्सर यह कहते रहे कि वर्तमान मोदी सरकार यदि तीसरी बार सत्ता में आई तो वह संविधान बदल देगी । भाजपा की लाख कोशिशों के उपरांत भी राहुल गांधी संविधान बचाने के अपने मुद्दे को ‘ कैश ‘ […]

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महत्वपूर्ण लेख संपादकीय

अवैध धर्मांतरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

स्वामी विवेकानंद कंपलीट वर्क्स खंड 5 पृष्ठ 233 पर लिखा गया है कि ” उनके ( मुस्लिमों ) ही अपने ऐतिहासिक लेखों के अनुसार जब पहली बार मुसलमान भारत आए तो भारत में हिंदुओं की जनसंख्या 60 करोड़ थी। इस कथन में न्यून वर्णन का दोष हो सकता है, किंतु अतिशयोक्ति का नहीं। क्योंकि मुसलमानों […]

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महत्वपूर्ण लेख संपादकीय

लोकसभाध्यक्ष पद और ओम बिरला का चुनाव

भाजपा के सांसद ओम बिरला लोकसभाध्यक्ष चुन लिए गए हैं। लगातार दूसरी बार इस संवैधानिक पद को प्राप्त करके उन्होंने एक इतिहास रचा है। इससे पहले कांग्रेस के बलराम जाखड़ के अतिरिक्त पी0ए0 संगम और जी0एम0सी0 बालयोगी दूसरी बार इस संवैधानिक पद को प्राप्त करने में सफल हुए थे। यद्यपि पूरे 10 वर्ष तक इस […]

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महत्वपूर्ण लेख संपादकीय

आपराधिक पृष्ठभूमि के सांसद और हमारी संसद

यह बहुत ही चिंता का विषय है कि देश की 18 वीं लोकसभा के कुल 543 सदस्यों में से 46% सांसद दागी प्रवृत्ति अर्थात आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। पिछली लोकसभा में ऐसे सांसदों की संख्या 43% थी। जब राजनीति में शुचिता और अपराधियों के राजनीतिकरण की प्रक्रिया पर रह – रहकर चर्चाएं की जा रही […]

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आतंकवाद संपादकीय

सिर उठाता आतंकवाद और हमारा पड़ोसी देश

‘ इंडिया’ गठबंधन के कई नेताओं ने जिस प्रकार अपने आपको चीनपरस्त और पाकिस्तानपरस्त दिखाकर देश के लोगों से वोट मांगे थे, उससे यह आशंका पहले से ही व्यक्त की जा रही थी कि यदि ‘ इंडिया ‘ गठबंधन मजबूत हुआ या इसकी सरकार आई तो पाक प्रायोजित आतंकवाद का बढ़ना निश्चित है। अब जबकि […]

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संपादकीय

राम मंदिर और देश के राजनीतिज्ञ

डॉ राकेश कुमार आर्य यद्यपि  विदेशी इतिहासकारों और देश के भीतर बैठे गद्दार इतिहासकारों ने  एक षड्यंत्र के अंतर्गत  रामचंद्र जी  और श्री कृष्ण जी जैसे महापुरुषों को भारत में कल्पनिक माना है और अपने इस  षडयंत्रपूर्ण कुचक्र  को सिरे चढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया है  कि  भारत का प्राचीन गौरव किसी भी […]

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संपादकीय

आरएसएस के निशाने पर भाजपा

18वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आने के पश्चात अप्रत्याशित रूप से भाजपा आरएसएस के निशाने पर आ गई है। भाजपा के परंपरागत ” फीलगुड ” के रोग को आरएसएस के बड़े नेता इंद्रेश कुमार ने लताड़ा है। उन्होंने संकेत में कहा है कि इस पार्टी को अहंकार हो गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभु […]

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संपादकीय

कांग्रेस की राजनीति और देश का मतदाता

हमारे देश में यदि संविधान की मौलिक अवधारणा ,चिंतन और उसके मर्म को समझकर काम करने की रणनीति पर विचार किया जाता तो देश से जाति, धर्म और लिंग के आधार पर प्रत्येक प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में काम किया जाता । इतना ही नहीं, इन उद्वेगकारी मनोवृतियों को भी समाप्त […]

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संपादकीय

भारतीय लोकतंत्र और महंगे चुनाव

स्वाधीनता के पश्चात भारत का प्रथम आम चुनाव 1952 में हुआ था। 1947 में महात्मा गांधी ने अपने शिष्य और राजनीतिक उत्तराधिकारी पंडित नेहरू को देश की जनता से पूछे बिना ही देश का प्रधानमंत्री बना दिया था। अब उन्हें पहली बार लोगों के बीच जाकर अपने लिए वोट मांगने का अवसर मिला। अन्य कोई […]

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