डॉ0 सौरभ मालवीय ‘सामाजिक संवाद और टीवी पत्रकारिता’ विषय पर आयोजित सत्र में आजतक न्यूज चैनल्स के एंकर सईद अंसारी ने कहा कि अपने आंख और कान खुले रखकर ही आप अच्छे पत्रकार बन सकते हैं। न्यूज चैनल्स में सिर्फ एंकर और रिपोर्टर ही नहीं होते हैं बल्कि कई और भी मौके हैं। पत्रकारिता मंग […]
Month: August 2014
नई दिल्ली, अगस्त 8, 2014। गीता के ज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करना आज की महती आवश्यकता है। विश्व हिन्दू परिषद दिल्ली के महा मंत्री श्री राम कृष्ण श्रीवास्तव ने आज एक बैठक के बाद कहा कि गीता व महा भारत की शिक्षाएँ यदि बाल मन में ही घर कर गईं होतीं तो आज […]
इंसान और पशु में यही फर्क है कि इंसान को सामाजिक प्राणी कहा जाता है और पशुओं को जंगली और पालतू दो वर्गों में बांट दिया गया है। संवेदनशीलता के लिहाज से सभी बराबर होते हैं, अभिव्यक्ति का अपना तरीका अलग-अलग हो सकता है। मनुष्य का शरीर धारण कर लेना अलग बात है। यह किसी […]
लाचार गौमाता
जेठमल जैन एडवोकेट यह कहावत प्रचलित थी कि पहले भारत में घी-दूध की नदियां बहती थीं। यानि भारत देश में इतना गोधन था कि प्रत्येक व्यक्ति को पीने को पर्याप्त मात्रा में शुद्घ दूध एवं खाने को शुद्घ घी मिल जाता था। हर घर में एक या अधिक गाय बंधी होती थीं। न आज जैसी […]
डॉ0 वेद प्रताप वैदिक जो काम केंद्र सरकार को करना चाहिए, उसे हमारा सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है। उसने केंद्र सरकार को सवा महिने की मोहलत दी है और उससे कहा है कि इस अवधि में या तो दिल्ली की प्रादेशिक सरकार गठित कीजिए या विधानसभा भंग कीजिए। दिल्ली की जनता को नई विधानसभा चुनने […]
नई दिल्ली, 7 अगस्त, 2014। सांसद श्री ओम बिरला द्वारा लोकसभा में पूछे गये जैतून की खेती से जुड़े अतारांकित सवाल का जवाब देते हुए केन्द्रीय कृषि एवं खाद प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने कहा कि वर्ष 2014-15 के दौरान आरंभ किये गये राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन (एनएमओओपी) के […]
आमतौर पर इंसान के चेतन और अवचेतन मस्तिष्क में उन सभी प्रकार की बातों का भण्डार जमा रहता है जो उसके जीवन में घटित होती हैं। जिन बातों या घटनाओं को वह देखता, सुनता और अनुभव करता है उसकी अपने आप पूरी रिकार्डिंग होती रहती है। हमारे मस्तिष्क में उन सारी घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा […]
ग्रामीण संस्कृति में ग्राम देवताओं और लोक देवताओं तथा लोक देवियों के दर्शन-पूजन-अर्चन की विशेष परंपरा सदियों से विद्यमान रही है। इनके प्रति ग्रामीणों की अगाध आस्था होती है और यही कारण है कि साल भर में कई बार विशेष पर्व-उत्सवों और मेलों-त्योहारों पर इन आस्था स्थलों पर विशेष आयोजन होते हैं जिनमें गांव भर […]
बिखरे मोती भाग-60
धर्म से अर्जित धन टिकै, चहुं दिशि यश फेेलायगतांक से आगे….कार्य में परिणत नही,तो रखो गुप्त विचार।दृढ़ संकल्प के सामने,अनुकूल होय संसार ।। 679।। मन उत्तम स्थिर मति,करै ना निज को माफ।सूरज की तरह चमकता,जिसका दामन साफ ।। 680।। करै दूसरों का मान जो,और राखै शुद्घ विचार।निज समूह में श्रेष्ठ हो,जैसे मणि हो चमकदार ।। […]
गतांक से आगे….. ऋग्वेद 8, 4, 2 में ‘यद्घा रूमे रूशमे’ अर्थात रूम और रूस के नाम भी आये हैं। जिस प्रकार अमुक अमुक उत्कृष्ट कारणों से अमुक-अमुक भूमिखण्ड को व्रज और अर्व आदि कह सकते हन्ैं, उसी तरह अमुक उत्कृष्ट गुणों के कारण कुछ देशों के नाम रूस भी हो सकते हैं। वर्तमान प्रसिद्घ […]