गतांक से आगे….इस व्याकुलता को सांड, भैंसा, बकरा आदि तुरंत ही मालूम कर लेते हैं और गर्भ स्थापन कर देते हैं। जिन मादा पशुओं को आवश्यकता नही है, उनके नर उनकी ओर दृष्टिपात भी नही करते। किंतु मनुष्य में यह बात बिलकुल नही पाई जाती। न तो ऋतुमती स्त्री को ही कोई विलक्षण व्याकुलता होती […]
Month: February 2014
गेंहूं-उपजाऊ मिट्टी 50 सेमी तक वर्षा, पहले 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान बाद में 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान-उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार परंतु राजस्थान, गुजरात में कम।चावल-चिकनी उपजाऊ मिट्टी, गर्म जलवायु, 75 सेमी से 200 सेमी तक वर्षा, बोते समय 20 डिग्री से. और पकते समय 27 से. तापमान चाहिए, […]
गतांक से आगे….दुनिया ने अब तक दो महायुद्घ देखे हैं। तीसरा महायुद्घ कब होगा, यह तो फिलहाल कहना कठिन है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि तीसरा महायुद्घ पानी के लिए होगा। चीन के चार सौ नगरों में पानी का अभाव है। चीन अपने पानी की कमी को पूरा करने के लिए हिमालय के ग्लेशियरों […]
आज का चिंतन-11/02/2014
हर कोई नहीं पा सकता अग्निधर्मा लोगों का साथ – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com एक-दूसरे के साथ रहना और निभाना वैचारिक और व्यवहारिक धरातल पर निर्भर है। जिन लोगों में वैचारिक समानता होती है, जिनका व्यवहार, चरित्र और कर्म समान है उनमें प्रतिस्पर्धा भी होती है, प्रतिद्वन्दि्वता भी, और सजातीय आकर्षण- विकर्षण भी। कई लोग ऎसे हैं जो […]
बिखरे मोती-भाग 38
जन्म से पहले अन्न को, भेज देय भगवानगतांक से आगे….नीम को सींचे ईख से,तो भी मिठास न पाय।कितना ही समझा दुष्ट को,सज्जनता नही आय ।। 522 ।।भाव यह है कि किसी के मूल स्वभाव को बदलना अत्यंत कठिन है।ऊपर से कोमल रहे,अंदर से हो क्रूर।ऐसे बगुला भगत से,रहो दूर ही दूर ।। 523 ।। दुर्जन […]
मेरठ का भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह क्षेत्र कुरूवंशी राजधानी हस्तिनापुर से ध्वंसावशेषों के पास ही बसा है। महाभारत की साक्षी है कि जब अर्जुन और कृष्णजी ने खाण्डव वन का दहन किया तो उन्होंने मय नामक शिल्पकार से मित्रता कर युधिष्ठिर के राजभवनों का इंद्रप्रस्थ में निर्माण कराया। जिनके अवशेष […]
आज का चिंतन-10/02/2014
चाहे जहाँ न रोएँ घर-गृहस्थी का रोना – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हर बात के लिए अपना एक विशिष्ट अंदाज और मंच होता है। सम सामयिकता और स्थान की उपयुक्तता हमारे कई सारे कामों को आसान कर देती है, कल्पनाओं को सहज ही आकार दे डालने में समर्थ होती है। हर व्यक्ति को इस बात का […]
आज का चिंतन-09/02/2014
मोहपाश में नज़रबंद न रहें दुनिया को जानें-पहचानें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com यों तो संसार और मुक्ति को एक-दूसरे का विरोधाभासी कहा जाता है लेकिन सत्य यह भी है कि संसार को जाने बिना मुक्ति संभव नहीं है। जहाँ संसार को जान लेने और समझ लेने की यात्रा का अंत होता है वहीं से […]
भारत की समस्या क्या है?
भारत की वास्तविक समस्या अशिक्षित समाज नही है जैसा कि कह दिया जाता है। वास्तव में भारत की वास्तविक समस्या शिक्षित समाज है। समस्या का निरूपण क्योंकि यह शिक्षित समाज करता है, इसलिए यह चोरी स्वयं करता है और कानून में दूसरों को फंसाता है। यह है इसकी शिक्षा का चमत्कार। वैसे हमारी व्यवस्था का […]
गतांक से आगे….आगामी धर्मसंसार में फेले हुए समस्त मतमतांतरों की आलोचना करता हुआ, एक विद्वान नामी पुस्तक में कहता है कि आगामी धर्म वैदिक धर्म ही होगा। अब संसार ईमान के दुर्ग से निकलकर बुद्घि और तर्क की ओर चल रहा है। जब तक मजहबी सिद्घांत को तत्वज्ञान पुष्ट न करे, तब तक वह स्थिर […]