Categories
इतिहास के पन्नों से महत्वपूर्ण लेख वैदिक संपत्ति

बहुत ही चमत्कार पूर्ण ढंग से बनाया गया था जैविक घड़ी को

  पूनम नेगी (लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं।) कभी सोचा है कि क्यों रात को एक तय समय पर पलकें झपकने लगती हैं और सुबह एक तय समय पर खुद व खुद हमारी आंखें खुल जाती हैं। हम ही नहीं पशु-पक्षियों और वृक्ष-वनस्पतियों का जीवनक्रम भी एक सुनिश्चित प्राकृतिक लय के अनुरूप ही चलता है। यह […]

Categories
वैदिक संपत्ति

आर्य समाज ही सनातन धर्म का विशुद्ध रूप है

🛕 कौन कहता है आर्य समाज नया पंथ है? श्रीराम, श्री कृष्ण, भगवान परशुराम,आचार्य चाणक्य आदि हमारे पूर्वज प्रतिदिन जिन श्रेष्ठ कार्यों को करते थे हमारा समाज उन्हें भूल कर अंधविश्वास और कुरीतियों में फंस गया था। उन्हीं कुरीतियों से निकालकर पुनः राम-कृष्ण की परंपरा के पुनर्जागरण अभियान को ही आर्य समाज कहते हैं(आर्य=श्रेष्ठ तथा […]

Categories
वैदिक संपत्ति

धार्मिक एवं सामाजिक साहित्य में सत्यार्थ प्रकाश का अग्रणीय स्थान है

ओ३म् =========== संसार में धर्म व नैतिकता विषयक अनेक ग्रन्थ हैं जिनका अपना-अपना महत्व है। इन सब ग्रन्थों की रचना व परम्परा का आरम्भ सृष्टि के आदिकाल में ही ईश्वर प्रदत्त वेदों का ज्ञान देने के बाद से हो गया था। सृष्टि को बने हुए 1.96 अरब वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। इस अवधि में […]

Categories
वैदिक संपत्ति

जानिए : रामायण कालीन अयोध्या ,किष्किंधा और चित्रकूट जैसे नगरों का बाद में क्या हुआ था ?

रामायण की प्रसिद्ध नगरिया जैसे अयोध्या, चित्रकूट, किष्किंधा इन सभी का बाद में क्या हुआ? ऐसा इसलिए ताकि हम भी यहूदियों की तरह खुद पर हुए अत्याचारों को याद रखे *1) #अयोध्या -* श्री राम और रघुवंशियो की राजधानी, सन 1270 में इस पर मुस्लिम आक्रमणकारी बाबर ने आक्रमण किया। बाबर ने अयोध्या के सभी […]

Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक संपत्ति इंद्र और वृत्र का अलंकार

गतांक से आगे…. इन्द्रो मधैर्मधवा वृत्रहा भुवत्।(ऋ०१०/२3/२) वृत्रहणं पुरन्दरम्। (ऋ० ६/१६/१४) यो दस्योर्हन्ता स जनास इन्द्र:।(ऋ० २/१२/१०) अर्थात् इंद्र ही मधवा और वृत्र के मारनेवाला हुआ। वृत्र को मारने वाला ही पुरन्दर है और जो दस्यु को मारने वाला है, वही इन्द्र है । यह वृत्र और दस्यु शब्द एक ही पदार्थ के वाचक हैं। […]

Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक संपत्ति : भारतीय सांस्कृतिक धरोहर

वैदिक संपत्ति गतांक से आगे… द्वितीय खंड में हम लिख आए हैं कि आर्यों की उत्पत्ति हिमालय के ‘ मानस ‘ स्थान पर हुई।बहुत दिन तक आर्य लोग हिमालय पर ही रहे। संततिविस्तार के कारण उन्होंने हिमालय से नीचे उतर कर भूमि तलाश की। जिस रास्ते से वे आये उस रास्ते का नाम उन्होंने हरद्वार […]

Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक संपत्ति : दक्षिण एशिया के विषय में

दक्षिणी एशिया पर कुछ लिखने के पूर्व दक्षिण भारत में आबाद द्रविड़ जाति की उत्पत्ति का विवरण विस्तारपूर्वक हो जाना चाहिए। क्योंकि पाश्चात्यों और उनके द्वारा शिक्षा पाए हुए कतिपय एतद्देशीय विद्वानों का मत है कि भारतवर्ष के मूल निवासी कोल और द्रविड़ ही है। आर्य लोग तो यहां कहीं बाहर से आकर आबाद हुए […]

Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक संपत्ति : एक अमूल्य ग्रंथ

गतांक से आगे… इस शब्दसाम्य के अतिरिक्त, चाल्डिया की डैल्यूज टेबलेट अर्थात् मनु के तूफान की कथा भी ज्यों की त्यों यहां के अनुसार ही लिखी हुई मिलती है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि वे आर्य ही है। हम अभी फिनिशियावालों के वर्णन के साथ लिख आए हैं कि बेबीलोनिया में पणियों और चोलों […]

Categories
वैदिक संपत्ति

तोप,बंदूक,बारूद

उनके अस्त्रशस्त्रों में अनेक प्रकार के यंत्र शामिल थे।तोप और बन्दूक यंत्र बनाने की विस्तारपूर्वक विधि शुक्र नीति अध्याय 4 में लिखी है।वहां बन्दूक और तोप दोनो का वर्णन है। बारूद बनाने और बारूद के द्वारा उनके चलाने का भी वर्णन है। बोलने वाली पुतलियां पुराने जमाने में ऐसा भी यंत्र पाया जाता था जो […]

Categories
विशेष संपादकीय वैदिक संपत्ति

मनुष्य का आदिम ज्ञान और भाषा-37

गतांक से आगे……… यहां हम थोड़ा सा उसका इतिहास देकर उसके विषय प्रतिपादन की ओर आना चाहते हैं। तिलक महोदय ने ‘ओरायन मृगशीर्ष’ ग्रंथ लिखने के पांच वर्ष बाद सन 1898 में उत्तरधु्रव निवास लिखा और उसका सारांश एक पत्र द्वारा मैक्समूलर के पास भेजा। पत्र के उत्तर में मैक्समूलर ने लिखा कि कितने ही […]

Exit mobile version