गतांक से आगे…… हमने यहाँ तक यह थोड़ी सी किन्तु देर तक गौर करने योग्य बात ईसाइयों , ईसाई शासकों और ईसाई थियोसो फिस्ट की लिखी है । यह वर्तमान जमाने की बात है , जो सबके सामने है , तो भी कितनी पेंचदार है ? पढ़े लिखे हिन्दू , पारसी , मुसलमान आदि सभी […]
गतांक से आगे…… हमने यहाँ तक यह थोड़ी सी किन्तु देर तक गौर करने योग्य बात ईसाइयों , ईसाई शासकों और ईसाई थियोसो फिस्ट की लिखी है । यह वर्तमान जमाने की बात है , जो सबके सामने है , तो भी कितनी पेंचदार है ? पढ़े लिखे हिन्दू , पारसी , मुसलमान आदि सभी […]
गतांक से आगे.. स्वामी विवेकानन्द की इस वक्तृता से स्पष्ट हो जाता है कि , थियोसोफिस्ट भारत का उत्कर्ष नहीं चाहते । उनका उद्देश्य तो संसार को ईसाई बनाना है । एनी बीसेंट सब धर्मावलम्बियों को थियोसोफी में केन्द्रित करके ईसा को संसार का धर्मगुरु मनवाने का यत्न करती हैं और कृष्णमूर्ति को ईसा का […]
गतांक से आगे… होमरूल लीग से पृथक् लो ० तिलक ने तो अपनी एक अलग संस्था निकाली । महात्मा गांधी भी कुछ काम करना ही चाहते थे और इसके लिए केवल देश का वातावरण ही देख रहे थे । इतने में हिंदू यूनिवर्सिटी का उत्सव हुआ । इसी में महात्मा गांधी के कार्य का भविष्य […]
गतांक से आगे… इस तरह से उस नवीन शिक्षक के द्वारा शिक्षा दिलाकर संसार को ईसाई धर्म के अनुकूल बनाने और सब धर्मों में ईसाइयत का शासन जमाने का उत्तम साधन किया गया । परन्तु पाप की नाव बहुत दिन तक नहीं चलती । भूतप्रेत दिखलानेवाले यंत्रों का भण्डाफोड़ खुद उसी आर्टिस्ट ने कर दिया […]
गतांक से आगे….. हम पहिले ही लिख आए हैं कि, कोलब्रुक आदिकों ने वेदों को प्राप्त करना चाहा था, पर द्रविड़ो ने उन्हें ठग लिया और वेदों को न दिया। किंतु पादरियों ने सोचा कि लोभी द्रविडों को रुपया देकर बाइबिल के सिद्धांतों को संस्कृत में लिखवा कर एक वेद तैयार करना चाहिए। वही किया […]
गतांक से आगे….. चौथी यूरोपनिवासिनी ईसाई जाती है, जिसने भारत में आकर आर्यों के रहे रहे विश्वासों को बदलने और वैदिक साहित्य के द्वारा अपने सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए महान प्रयत्न किया हैं।यद्यपि ईसाई जाति ने इस देश को बहुत बड़ी हानि पहुंचाई है, परन्तु हम यहां वह सब नहीं लिखना चाहते हैं। […]
गतांक से आगे… इसके आगे मुसलमानी धर्म में सब को लाने के लिए लिखा है कि- चीला छोड़ो न दीन का धांचा मत खाव, सुनो बटाऊ बाबरे मत भूल न जाव। सांचा दीन रसूल का सो तमे सही करिजाणों, जो कोई आवे दीन में उनको दीन में आणों।। अर्थात् हे मुसाफिर! सुन। भूलना नहीं, धोखा […]
गतांक से आगे…. जाली ग्रंथों के रचने का एक नमूना हमने खुद देखा है। उड़ीसा में आठगण नामी एक देसी राज्य है। वहां के राजा का नाम विश्वनाथ है। राजा साहब संस्कृत में कविता कर लेते हैं। उन्होंने व्यास के नाम से अपने गांव के महादेव का माहात्म्य वर्णन किया है और एक पुस्तक में […]
गतांक से आगे…. इसलिए यह निश्चय और निर्विवाद है कि, चितपावनों ने जिस प्रकार छल से क्षत्रियों का राज्य लिया और जिस प्रकार छल से ग्रन्थों में मिश्रण किया, उसी तरह छल से ही उन्होंने अपनी जाति की यह कथा और पूजा भी आर्यों में दाखिल कर दी। यहूदी लोग संसार में छ्ली प्रसिद्ध हैं। […]
गतांक से आगे… इन समस्त कथाओं का इतना ही तात्पर्य है कि, देवी से ब्रह्मा, विष्णु और शंकर हुए और ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर के मिश्रण से दत्तात्रेय की उत्पत्ति हुई। अर्थात् दत्तात्रेय की उत्पत्ति ब्रह्मा, विष्णु ,महेश से हुई और ब्रह्मा, विष्णु, महेश को पैदा करने वाली देवी है। अब देखना चाहिए कि, इस […]