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वैदिक संपत्ति : संप्रदाय प्रवर्त्तन

  गतांक से आगे … प्रस्थानत्रयी नाम बौद्वों के त्रिपिटक नाम की नकल है।जिस प्रकार बौद्धों के तीन प्रकार के साहित्य को त्रिपिटक कहते हैं, उसी प्रकार वेदान्त से सम्बन्ध रखने वाले तीनों प्रकार के साहित्य को प्रस्थानत्रयी कहते हैं और जिस प्रकार आसुर धर्म हटाने के लिए त्रिपिटक की योजना हुई थी, उसी तरह […]

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आर्यों का सम्प्रदाय परिवर्तन

  आर्यों का संप्रदाय परिवर्तन ऊपर हम यह दिखला आए हैं कि आस्ट्रेलिया निवासी अनार्य लोग, मौका पाकर द्रविड़ होकर ब्राह्मण बन गए और अपने देश तथा जाति के असभ्य और अनार्य आचार – विचारों को आर्यों में वेद, धर्म और यज्ञ आदि के नाम से प्रचलित किया।वही सब आचार – विचार पहले पड़ोसी देशों […]

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वैदिक संपत्ति : गतांक से आगे

गतांक से आगे… कृष्ण यजुर्वेद के तैत्तिरीय ब्राह्यण में लिखा है कि ‘वाचे पुरुषमालभते’ इस पर सायणाचार्य भाष्य करते हुए लिखते हैं कि, ‘वाग्देवतायै पुरुषं पूरकं स्थूलशरीरमित्यर्थ: अर्थात् वाणी के देवता के लिए पुरुष का वध करें। उसी में फिर लिखा है कि ‘ ब्राह्मणे ब्राह्मणमालभते’ इस पर सायणाचार्य कहते हैं कि ‘ब्राह्मणजात्याभिमानी देवसत्यस्मै कञ्चित् […]

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वैदिक संपत्ति में द्रविड़ और आर्य के बारे में

वैदिक संपत्ति   गतांक से आगे… (1) इस तैत्तिरीय कृष्ण यजुर्वेद के विषय में नए और पुराने सभी विद्वानों ने कहा है कि यह मलिन बुद्धि से रचा गया है,इसलिए यह द्रविड़ो का ही रचा हुआ है।वेदभाष्यकार महीधर कहते हैं कि ‘तानि यजूषि बुद्धिमालिन्यात्कृष्णानि’ अर्थात बुद्धिमालिन्य से कृष्ण यजुर्वेद की उत्पत्ति हुई है।इसी तरह स्वामी […]

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वैदिक संपत्ति: द्रविड़ और आर्य की मान्यता

गतांक से आगे… हम इसके पूर्व बदला आए हैं कि, आस्ट्रेलिया से लंका होते हुए विदेशियों का एक दल आकर मद्रासप्रांत में आबाद हो गया था। इस आगत दल का राजा रावण था। वह पंडित बहुत और योधा होते हुए भी दुराचारी था।वह इस देश में राज्यकामना से आया था, पर रामचंद्र के द्वारा युद्ध […]

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विश्वगुरू के रूप में भारत वैदिक संपत्ति

चितपावन ब्राह्मणों के बारे में

  गतांक से आगे… हिंदुस्तान में आ जाने पर द्रविड़ों के साथ मेलजोल होने से उनकी गणना पच द्रविड़ो में हो गई । जहां नई बस्ती होती है, वहीं पर सब जातियों की वर्गाकार बस्ती बन सकती है ।इस तरह की पद्धतिवार बस्ती वाले गांव कोकण में ही है।इससे सिद्ध हो जाता है कि कोकणस्थ […]

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इतिहास के पन्नों से महत्वपूर्ण लेख वैदिक संपत्ति

बहुत ही चमत्कार पूर्ण ढंग से बनाया गया था जैविक घड़ी को

  पूनम नेगी (लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं।) कभी सोचा है कि क्यों रात को एक तय समय पर पलकें झपकने लगती हैं और सुबह एक तय समय पर खुद व खुद हमारी आंखें खुल जाती हैं। हम ही नहीं पशु-पक्षियों और वृक्ष-वनस्पतियों का जीवनक्रम भी एक सुनिश्चित प्राकृतिक लय के अनुरूप ही चलता है। यह […]

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आर्य समाज ही सनातन धर्म का विशुद्ध रूप है

🛕 कौन कहता है आर्य समाज नया पंथ है? श्रीराम, श्री कृष्ण, भगवान परशुराम,आचार्य चाणक्य आदि हमारे पूर्वज प्रतिदिन जिन श्रेष्ठ कार्यों को करते थे हमारा समाज उन्हें भूल कर अंधविश्वास और कुरीतियों में फंस गया था। उन्हीं कुरीतियों से निकालकर पुनः राम-कृष्ण की परंपरा के पुनर्जागरण अभियान को ही आर्य समाज कहते हैं(आर्य=श्रेष्ठ तथा […]

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धार्मिक एवं सामाजिक साहित्य में सत्यार्थ प्रकाश का अग्रणीय स्थान है

ओ३म् =========== संसार में धर्म व नैतिकता विषयक अनेक ग्रन्थ हैं जिनका अपना-अपना महत्व है। इन सब ग्रन्थों की रचना व परम्परा का आरम्भ सृष्टि के आदिकाल में ही ईश्वर प्रदत्त वेदों का ज्ञान देने के बाद से हो गया था। सृष्टि को बने हुए 1.96 अरब वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। इस अवधि में […]

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जानिए : रामायण कालीन अयोध्या ,किष्किंधा और चित्रकूट जैसे नगरों का बाद में क्या हुआ था ?

रामायण की प्रसिद्ध नगरिया जैसे अयोध्या, चित्रकूट, किष्किंधा इन सभी का बाद में क्या हुआ? ऐसा इसलिए ताकि हम भी यहूदियों की तरह खुद पर हुए अत्याचारों को याद रखे *1) #अयोध्या -* श्री राम और रघुवंशियो की राजधानी, सन 1270 में इस पर मुस्लिम आक्रमणकारी बाबर ने आक्रमण किया। बाबर ने अयोध्या के सभी […]

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