कविता — 43 जब तैंतीस कोटि देवों की यह भारत भूमि होती थी। भारत के रहते सारी दुनिया तब बेफिक्री से सोती थी।। आलम की मस्ती न्यारी थी भारत के दुनिया गुण गाती, चहुंओर शांति पसरी थी हर भोर शांति पर इठलाती ।। धनुर्धारी वीर भारत के तब धर्म की रक्षा करते थे, जितने भी […]
यदि राम धर्म से गिर जाते ….