कविता — 51 जीवन के संगीत में , मिश्री सी तू घोल। मनवा सुख की खोज में ,ओ३म् – ओ३म् ही बोल॥1॥ जगत की चिन्ता छोड़ दे ,चिंतन कर सुबह शाम । भजले मनवा ईश को, पूरण करता काम ॥2॥ द्वन्द्वभाव को त्यागकर ,पकड़ डगरिया मीत। मालिक तेरा है जहाँ ,है सुख की नगरी मीत॥3॥ […]
देश का भूत, वर्तमान और भविष्य –1