डॉ विवेक आर्य गांधीजी द्वारा इस बात को तर्कसंगत बनाने और स्पष्ट निंदा न करने से सावरकर को घृणा हुई। गांधी के इन कथनों का तीखा जवाब देते हुए सावरकर ने 10 फरवरी 1927 को ‘गांधीजी और निर्दोष हिंदू’ शीर्षक से एक निबंध लिखा। एक हिंसक हत्यारे को ‘भाई’ कहने की निंदा करते हुए सावरकर […]