वेद मानवजाति के लिए सृष्टि के आदि में ईश्वरप्रदत्त ‘संविधान’ हैं। अतः ऐसा नहीं हो सकता कि हमारा आज का मानव कृत संविधान तो नागरिकों के मूल कर्त्तव्यों का निरूपण करे और वेद इस विषय पर चुप रहे। वेदों में मानव और मानव समाज के आचार विचार और लोक व्यवहार से सम्बन्धित ऋचाऐं अनेक हैं। […]
मूल कर्त्तव्य और वेद का राष्ट्र संगठन