* वास्तविक धर्म क्या है और धर्म कैसा होना चाहिए।धर्म क्या है इस पर वैषेशिक के महर्षि कणाद कहते हैं:- ‘यतोऽभ्युदय निःश्रेयस्सिद्धि स धर्मः’। अर्थात् जो कर्म हमारा अपना उद्धार अरें और प्राणी मात्र को जिससे सुख मिले वह धर्म है। परमात्मा ने संसार रचा।उसमें नाना प्रकार के फल फूल,वनस्पतियाँ,औषधियाँ,अन्न,आदि उसने हमारे लिए उत्पन्न किये।उस […]
🌷मनुस्मृति और धर्म 🌷*