डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 हम जो हैं वही दीखें यह मौलिकता है जबकि हम जो हैं वैसे न दिखें और इसकी बजाय हमारे दूसरे चेहरे दिखें तो इसका यही अर्थ है कि हम अपनी मौलिकता को त्याग बैठे हैं और सांसारिक आडम्बरों के इन्द्रधनुषों ने हमें इतना घेर लिया है कि हम हमारी पहचान भुला […]
कुर्सी के लायक हम हैं भी या नहीं ?