बिखरे मोती “प्रकृति परिवर्तनशील है” किन्तु इस नियम में अपवाद भी है, जैसे:- हवा सदा बहती रहे, पर्वत रहें कठोर। रवि सदा तपता रहे, सांझ होय चाहे भोर।।1998॥ भक्ति की परिकाष्ठा के संदर्भ में – भक्ति चढ़े परवान तो, छूट जाय संसार। कण-कण में दिखने लगे, सबका प्राणाधार॥1999॥ वैश्वानार एक रूप अनेक – फूलों में […]
“प्रकृति परिवर्तनशील है”