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एक ज़िंदगी जो सम्मान की हक़दार है

समीना

दिल्ली

जीवन का सबसे अच्छा पल बचपन ही होता है. यह वह पल होता है जब हमें किसी भी बात की चिंता नहीं रहती है. न वर्तमान की चिंता होती है और न भविष्य का डर सताता है. हम खिलौनों से खेलते हैं और सभी लोग हमें प्यार करते हैं, साथ ही हम जो चाहे पढ़ सकते हैं. लेकिन सभी बच्चों की किस्मत में यह सारे सुख नहीं होते हैं. जिन बच्चों को बाल मजदूरी के काम में लगा दिया जाता है, वह कभी भी खेल नहीं पाते हैं और अपना मनचाहा काम नहीं कर पाते हैं. जिसके कारण उनका पूरा बचपन मजदूरी के काम में बीत जाता है. आज हमारे देश में किसी बच्चे को श्रम करते हुए देखना आम बात हो गई है. बाल मजदूरी को दबंगों और माफियाओं ने व्यापार बना लिया है. जिसके कारण दिन-प्रतिदिन हमारे देश में बाल श्रम का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव बच्चों के जीवन पर पड़ रहा है. इससे न केवल उनका बचपन खराब हो रहा है बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता भी प्रभावित हो रही है. इस से बच्चों का भविष्य तो खराब होता ही है, साथ में देश के विकास में भी बाधाएं आती हैं.

ऐसा नहीं है कि बाल श्रम रोकने के लिए कोई क़ानून नहीं है. केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकारों ने बाल श्रम रोकने के लिए न जाने कितने कानून बनाए हैं और न जाने कितनी योजनाएं बनाई गई है. जिसमें उनकी पढ़ाई से संबंधित योजनाएं भी हैं, जैसे सरकारी स्कूल में मुफ्त शिक्षा और मिड डे मील जैसे महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं. जिससे कि भारत का हर बच्चा शिक्षा प्राप्त कर सके. इसके अतिरिक्त कई सख्त कानून भी हैं जो बाल श्रम को रोकने के लिए समय समय पर बनाए गए हैं. लेकिन इसके बावजूद शहर से लेकर गांव तक बच्चों को मज़दूरी करते देखा जा सकता है. जिस उम्र में बच्चों को पढ़ना चाहिए उस उम्र में वह मजदूरी करता पाया जाता है. यह बहुत गंभीर और चिंता का विषय है.

देश के संविधान में सख्ती से बाल श्रम निषेध कानून का ज़िक्र किया गया है. साधारण शब्दों में समझाया जाए तो जो बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के होते हैं, उनसे उनका बचपन, खेल-कूद, शिक्षा का अधिकार छीनकर, उन्हें काम में लगाकर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित कर, कम रुपयों में काम करा कर शोषण करके, उनके बचपन को श्रमिक के रूप में बदल देना ही बाल श्रम कहलाता है, जो पूर्ण रूप से गैर कानूनी है. भारत के संविधान 1950 के 24वें अनुच्छेद के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी, कारखानों, होटलों, ढाबों, घरेलू नौकर इत्यादि के रूप में कार्य करवाना बाल श्रम के अंतर्गत आता है. अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है, तो उसके लिए उचित दंड का प्रावधान है. हालांकि इस प्रकार की मजदूरी को समाज के हर वर्ग द्वारा निंदित भी किया जाता रहा है. लेकिन कई जगह खुलेआम तो कहीं चोरी छिपे बाल श्रम बदस्तूर जारी है.

सरकार देश को बाल श्रम से पूर्णतः मुक्त करवाने के लिए अनेक कानून बनाती आई है. लेकिन जब तक हम और आप उन कानूनों का सही ढंग से अनुसरण नहीं करेंगे तब तक देश को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त कराना संभव नहीं है. सरकार द्वारा बनाए गए कुछ कानूनों में The Child Labour (Prohibition and regulation) (निषेध और विनियमन) Act 1986 – बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार द्वारा 1986 में चाइल्ड लेबर एक्ट बनाया गया है जिसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे से कार्य करवाना दंडनीय अपराध माना गया है. The Juvenile Justice (Care and Protection) (देखभाल और संरक्षण) of Children Act of 2000 – इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति बच्चों से मज़दूरी करवाता है या फिर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है. The Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 – यह कानून वर्ष 2009 में बनाया गया था, जिसके अंतर्गत 6 से14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी, साथ ही प्राइवेट स्कूलों में भी गरीब और विकलांग बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित होंगी.

बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण हमारे देश में गरीबी का होना है. गरीब परिवार में आमदनी की अपेक्षा सदस्यों की संख्या अधिक होती है. ऐसे में वह लोग अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ होते हैं, इसलिए वह अपने बच्चों को मजदूरी के लिए भेज देते हैं. शिक्षा के अभाव के कारण भी अभिभावक यही समझते हैं कि जितना जल्दी बच्चे कमाना सीख जाए उतना ही जल्दी उनके लिए अच्छा होगा. कुछ माता पिता लालच में जोकि स्वयं कार्य करना नहीं चाहते और अपने बच्चों को चंद रुपयों के लिए कठिन कार्य करने के लिए भेज देते हैं. बाल श्रम को बढ़ावा इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि बच्चों को कार्य करने के प्रतिफल के रूप में कम रुपए दिए जाते हैं, जिसके कारण लोग बच्चों को काम पर रखना अधिक पसंद करते हैं.

आज समय आ गया है कि हमें इस विषय पर बात करने के साथ-साथ अपनी नैतिक ज़िम्मेदारियां भी समझनी होंगी. बाल मजदूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना हमारे देश के लिए आज एक चुनौती बन चुका है क्योंकि बच्चों के माता-पिता ही बच्चों से कार्य करवाने लगे हैं. बाल श्रम भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में गैर कानूनी घोषित किया जा चुका है. यह किसी भी सभ्य समाज के लिए एक कलंक है. हैरत की बात यह है कि जैसे जैसे हम खुद को शिक्षित और सभ्य कहला रहे हैं, वैसे वैसे यह समस्या और इसके आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं. यदि समय रहते इस बुराई को जड़ से मिटाया नहीं गया, तो इससे पूरे देश का भविष्य संकट में आ सकता है, क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं और उन्हें भी सम्मान से जीने का हक़ है. यह हक़ उन्हें देश का संविधान देता है. (चरखा फीचर)

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