साधना से सृजन करे, कोई दाता या शूर। सृष्टि-हित में रत रहे, ईश्वर का है नूर॥1656॥ भावार्थ:- अपनी आजीविका आजीविका के लिए सामान्य व्यक्ति कुछ न कुछ उत्पन्न करने अथवा निर्माण करने में लगा हुआ है किन्तु संसार में ऐसे ही व्यक्ति होते परमपिता परमात्मा की बनाई सृष्टि के कल्याण के लिए निर्माण अथवा अनुसंधान […]
साधना से सृजन करें, कोई दाता या शूर