डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा फेरीवाले अपनी किस्म-किस्म की आवाजों और बोलियों के बहाने भाषा को समृद्ध बनाते थे। सच्चे अर्थों में वे भाषा का विकास करने वाले व्यावहारिक प्रोफेसर थे। उनके शब्द-भंडार, वाक्य, संदर्भ और अनुच्छेद किसी प्रवाहमय सरिता का स्मरण कराती थी। एक समय था जब फेरीवाले अपनी किस्म-किस्म की आवाजों से हमारा ध्यान […]