========= यज्ञ में पांच घृत आहुतियों को देने का मुख्य प्रयोजन यह है कि समिधाओं पर इन घृत आहुतियों से अग्नि पूर्णरूप से जल उठे अर्थात् यज्ञ वेदी में रखी समिधायें भली प्रकार से जलने लगे। इसका कारण यह है कि इन आहुतियों के कुछ अन्तराल पर हम सामग्री वा साकल्य की आहुतियां देते हैं। […]
Month: October 2019
-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। संसार में हम सूर्य, चन्द्र तथा पृथिवी आदि लोकों तथा पृथिवी पर अग्नि, जल, वायु सहित वनस्पतियों एवं अन्यान्य प्राणियों की सृष्टि को देखते हैं। इनको उत्पन्न करने वाला अर्थात् इनका रचयिता कौन है, इसका निभ्र्रान्त ज्ञान हमें व हमारे अधिकांश बन्धुओं को नहीं है। इसका उत्तर महर्षि दयानन्द ने सन् […]
25 दिसंबर 1861 को जन्मे पंडित मदन मोहन मालवीय जी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक दैदीप्यमान नक्षत्र हैं । उन्होंने गांधी जी के साथ रहकर भी और गांधीजी से अलग होकर भी मुस्लिम तुष्टीकरण जैसी उनकी राष्ट्रघाती नीतियों का विरोध किया था । मालवीय जी से पहले स्वामी दयानंद जी ने सत्यार्थ – प्रकाश हिन्दी […]
इमरान खान को नियाजी शब्द से घृणा
शायद आपने ध्यान दिया होगा कि संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की प्रथम श्रेणी की महिला आईएफएस अधिकारी विदिशा मैत्री ने जब इमरान की स्पीच का जवाब दिया तो उन्होंने अपने सम्बोधन में मि0 इमरान न कहकर मि0 इमरान अहमद खां नियाजी कहकर संबोधित किया। इससे न सिर्फ इमरान बल्कि पूरा पाकिस्तान उबल और जलभुन […]
भोजन से पूर्व बोलने का मंत्र
*ओ३म् अन्नपतेऽन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः* *प्र प्रदातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे ।।* भावार्थ : हे अन्न के स्वामी परमात्मन् ! हम को रोग रहित और बल दायक अन्न दीजिए ।अन्न का दान करने वाले को सुखी रखिए। हमारे दो पैर वाले तथा चार पैर वाले प्राणियों को यहां अन्न शक्ति देवे। *काव्यमय भाव*🎤 […]
मानस में आते रहे, क्षण-क्षण व्यर्थ विचार। खारिज कर आगे बढै, भवनिधि उतरै पार॥ ॥1245॥ व्याख्या:- जिस प्रकार सागर का जल कभी शांत नहीं रहता है, उसमें हर समय छोटी-बड़ी लहरें उठती ही रहती हैं। ठीक इसी प्रकार मनुष्य का मन क्षण-प्रतिक्षण चलायमान रहता है। कभी शांत और एकांत बैठकर मन का तटस्थ भाव से […]
तोप,बंदूक,बारूद
उनके अस्त्रशस्त्रों में अनेक प्रकार के यंत्र शामिल थे।तोप और बन्दूक यंत्र बनाने की विस्तारपूर्वक विधि शुक्र नीति अध्याय 4 में लिखी है।वहां बन्दूक और तोप दोनो का वर्णन है। बारूद बनाने और बारूद के द्वारा उनके चलाने का भी वर्णन है। बोलने वाली पुतलियां पुराने जमाने में ऐसा भी यंत्र पाया जाता था जो […]
लिखो! बस- लिखो!! मेरी कविता विश्व-प्रिया मित्र है जन-जन की पीड़ा- अतृप्त हृदय की उच्छवास है- किसी अभावग्रस्त श्वास की अभिव्यक्ति है जीवन के भीतर की बाहर की मुर्दा मुस्कानों को ढ़ोते किसी जीवित शव की सड़क पर खामख्वाह विचरते दिमाग की कालेज,क्लब,महानगर के कठफोड़वे की शब्दों के दांव-पेंचों में लुढ़कते किसी वाद की पहाड़,जंगल,गांव […]
निर्धन का घर
निर्धन के घर जाकर देखो अमन चैन सुख पाओगे। राज महल के भोग छोड़कर आधी रोटी खाओगे ।। रोज सबेरे जल्दी उठकर पशु पोषण में लग जाता । दुहकर दूध गऊ माता का दूर शहर को ले जाता ।। शीत ऊष्ण अति वर्षण में भी कभी नहीं घर पाओगे । निर्धन के घर———— जेठ माह […]
अखिलेश आर्येन्दु आर्य और द्रविण को लेकर ईसाई पादरियों द्वारा जाति, भाषा, सभ्यता, संस्कृति, क्षेत्र और धर्म के आधार पर काल्पनिक विभेद को विश्व इतिहास में सत्य साबित करने के लिए पिछले दो सौ वर्षों के अन्तराल में एक षड्यंत्र के तहत अभियान चलाया गया। भारत में ब्रिटिश सत्ता जब तक कायम रही तब तक […]