Categories
वैदिक संपत्ति

तोप,बंदूक,बारूद

उनके अस्त्रशस्त्रों में अनेक प्रकार के यंत्र शामिल थे।तोप और बन्दूक यंत्र बनाने की विस्तारपूर्वक विधि शुक्र नीति अध्याय 4 में लिखी है।वहां बन्दूक और तोप दोनो का वर्णन है। बारूद बनाने और बारूद के द्वारा उनके चलाने का भी वर्णन है।

बोलने वाली पुतलियां

पुराने जमाने में ऐसा भी यंत्र पाया जाता था जो आदमी की भांति बोलता था।विक्रमादित्य के सिंहासन की पुतलियां बराबर बोलती थी। यही नहीं वाल्मीकि रामायण लंकाकांड सर्ग 80 में लिखा है, कि रावण ने एक कृत्रिम सीता बनाई थी, जो राम का नाम लेकर रोती थी।

दूर समाचार भेजने के साधन

इसी तरह वैदिक काल में दूर खबर भेजने का भी साधन था।यह साधन कबूतर थे।ये कबूतर पत्र पहुंचाया कहते थे।ऋग्वेद में इसका वर्णन है।कबूतरों के सिवा थोड़ थोड़ी दूर पर नगाड़े रखवा कर एक दूसरे की आवाज के द्वारा शीघ्र और दूर खबर पहुंचाई जाती थी।अभी हाल में अमृत बाजार-पत्रिका ने इस विषय से संबंध रखने वाला एक बड़ा ही उत्तम मजमून छापा है। वह कहता है कि दक्षिण हैदराबाद में पत्थरघाटी नाम का ग्राम हैIउस ग्राम में डॉ सैयद मोहम्मद कासिम साहब रहते हैं।आपके बुजुर्ग बीजापुर राज्य के पुरोहित थेI आपके यहां बहुत बड़ा संस्कृत का पुस्तकालय हैं।आप इस पुस्तकालय की अच्छी देखभाल रखते हैं।इस पुस्तकालय में एक संस्कृत की पुस्तक है,जिसमें अनेक विधाओं के वर्णन के साथ दूर देश में खबर भेजने वाले यंत्र का भी वर्णन दिया हुआ हैIइसमें लिखी हुई विधि के अनुसार दो पत्थरों को बनाकर और चाहे जितनी दूर पर रखकर उनके द्वारा बातचीत कर सकते हैं।हमारा विश्वास है कि पुराने जमाने में इस यंत्र के द्वारा काम लिया जाता होगा।क्योंकि शुक्रनीति अध्याय 1, श्लोक 367 में लिखा है कि आयुतं कोशजां वार्ता हरेदेकदिनेन वै
अर्थात राजा एक दिन में 10000 कोस की बात जाने। इससे ज्ञात होता है कि शीघ्र खबर पहुंचाने वाले यंत्रों का आविष्कार हो चुका था।

भौतिक विज्ञान

हमने यहां तक सूक्ष्म यन्त्रों का वर्णन कर दिया है।अब थोड़ा सा भौतिक विज्ञान का भी वर्णन करते हैं।पुराने जमाने वालों ने सूर्यकांतमणि का तो आविष्कार किया ही था,किंतु उससे भी सूक्ष्म चंद्रकांतमणि का भी आविष्कार कर लिया था।अब तक यूरोप की बढ़ी हुई साइंस भी ऐसा वैज्ञानिक यन्त्र नहीं बना सकी। चंद्रकांतमणि के द्वारा चंद्रमा से पानी बनाया जाता था और बीमारों को पिलाया जाता था। सुश्रुत सूत्रस्थान 45/27 में लिखा है कि-
रक्षोघ्नं शीतल आदि ज्वरदाहविषापहमI चंद्रकांन्तोद्रवं वारि पित्तध्न विमलं स्मृतम्॥
अर्थात चंद्रकांत से बना हुआ जल शीतल,विमल,आनंद देने वाला और पित्त ज्वरदाह और विष का नाश करने वाला है।यह चंद्रकांतमणि अकबर बादशाह के जमाने तक थी। इसका जिक्र ‘आईनअकबरी’ में आया हैIसूर्य की सात किरणों का प्रभाव भी यहां वालों को ज्ञात था।वेद के ‘सप्ताश्र’ प्रकरणानुसार सूर्य की सात किरणों का ज्ञान संसार में सबसे पहले आर्यों ने ही प्राप्त किया था।वे आकाश की अन्य शक्तियों का भी विज्ञान जानते थेI ज्योतिष के ग्रंथों में भूमि से ऊपर की दूरी लिखी हुई है।जहां पृथ्वी के कण,वायु,मेघ और विद्युत आदि रहते हैं।वहां लिखा है कि- मेघ, विद्युत और वायु आदि जमीन से 12 योजन की ऊंचाई पर है।यही नहीं प्रत्युक्त उन्होंने सूर्य के अंदर के उन काले दागों को भी देख पाया था,जिनको बड़े-बड़े पश्चात ज्योतिषियों ने बड़े-बड़े दुरबीनों के सहारे जान पाया है।बाल्मीकि रामायण युद्ध 23/9 में रामचंद्र लक्ष्मण से कहते हैं कि-
देखो,विमल आदित्य में छोटा सा काला दाग दिखाई पड़ता है। इन वर्णनों से स्पष्ट है कि उस जमाने में विज्ञान बहुत ऊंचे दर्जे तक पहुंच चुका था और यहां बहुत ही ऊंचे वैज्ञानिक साधन प्रस्तुत थे। भारत के जिन दिनों का यह वर्णन है वह दिन यहां वैज्ञानिक दृष्टि से उसी प्रकार के थे जैसे आजकल यूरोप के हैं।
हम कह आये हैं कि सूक्ष्मतर विज्ञान से विलासिता बढ़ती है।यह विलासिता यहां भी बढ़़ी थी और उसने पृथ्वी के दूर-दूर देशों तक अपना जहर फैलाया था।यदि सच कहें तो कह सकते हैं कि भारत देश आजकल उसी पाप का प्रायश्चित कर रहा है।
यहां के सूक्ष्मतर विज्ञान के द्वारा यहां विलासिता के अनेक पदार्थ बनने लगे थे और दूसरे देशों का धन अपहण होने लगा था। यहां की मजलीन और मलमल, यहां की छीट और यहां के जवाहरातों ने संसार को चकाचौंध में डाल दिया था। एनटानियो सेन्शन ने छीट छापने के विषय में एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखा है। इसमें लिखा है कि ‘ई० सन् के 2000 वर्ष पूर्व इस विद्या को भारतीय जानते थे।समस्त लेखक इस विषय में सहमत हैं कि भारतवर्ष कपड़ा पर छींट छपने की जन्मभूमि है।यूरोपवाले इस कला की नकल करने के बहुत दिन पूर्व हिंदुस्थान के छपे कपड़े को जानते थे।इतने वर्ष बीतने पर हमने रंग में अंतर किया है पर उनका मूल रूप वैसा ही है ,जैसा भारतवासियों ने बताया था। क्रमशः

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis