गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज अन्य देवोपासक और भक्तिमार्गी पीछे हम कह रहे थे कि गीता बहुदेवतावाद की विरोधी है और एकेश्वरवाद की समर्थक है। यहां पुन: उसी बात को श्रीकृष्ण जी दोहरा रहे हैं, पर शब्द कुछ दूसरे हैं। जिन्हें सुनकर लगता है कि वे बहुदेवतावाद को बढ़ावा दे रहे हैं। वह […]
Month: January 2018
वोट तक सीमित न हो लोकतंत्र
इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया गया। यही नहीं, मुद्दों पर बात करने के बजाय व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप पर फोकस किया गया। इसका कारण यह […]
मन की शक्ति असीम है, करके देख तू एक
बिखरे मोती-भाग 215 गतांक से आगे…. उसके हृदय की सात्त्विकता, आर्वता (सरलता) और पवित्रता प्रभु का भी मन मोह लेती है। ऐसी अवस्था बड़ी तपस्या के बाद आती है, बड़ी मुश्किल से आती है और यदि कोई व्यक्ति इस अवस्था को प्राप्त हो जाए, तो समझो वह वास्तव में ही प्रभु से जुड़ गया है। […]
दिल्ली में हर साल की तरह इस बार भी स्मॉग ने अपना कहर बरपा किया है। इसकी गिरफ्त में आकर बहुत से लोगों को हृदय की बीमारियों ने घेर लिया है, तो कईयों को ऐसी ही दूसरी घातक बीमारियों के उभरने की शिकायत रही है। यह सब इसलिए हुआ है कि हमारे किसानों ने अपने […]
गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार ईश्वर को एक देशीय न मानना स्वयं अपने बौद्घिक विकास के लिए भी आवश्यक है। आज का मनुष्य धर्म में भी व्यापार करता है। इसलिए हम उसे व्यापार में मुनाफे का एक सौदा बता रहे हैं कि वह ईश्वर को सर्वव्यापक सर्वान्तर्यामी माने और परिणाम में […]
राजनीतिक भीख नहीं तपोवन सत्र
माननीय विधायक अगर वाकआउट करें, तो खर्च का हिसाब लगाना वाजिब है, लेकिन सदन में सत्र के दिन बढ़ें तो लोकतांत्रिक प्रासंगिकता बढ़ती है। अत: तपोवन में विधानसभा का ताप बढ़ाने के लिए सत्र की अवधि में विस्तार की गुंजाइश हमेशा रहेगी। विधानसभा का तपोवन में होना या शीतकालीन सत्र के दौरान होने की आशा […]
दम क्यों निकल रहा आलू का
आलू किसानों की बदहाली के बारे में सुनना जरा अजीब लगता है क्योंकि आमतौर पर हर सब्जी में आलू का समावेश है और चिप्स-पापड़ से लेकर तमाम व्यंजनों में पडऩे वाले आलू की मांग बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी करती हैं। जिस देश में आलू के चिप्स का पैकेट हर दूसरे व्यक्ति के हाथ में दिख जाता […]
गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इससे अगले श्लोक में श्रीकृष्णजी कहते हैं कि इस संसार में लोग किसी को ब्राह्मïण, किसी को बड़ा, किसी को चाण्डाल तो किसी को छोटा कहते हैं। जबकि सभी मनुष्यों में ‘मैं’ ही समाया होता हूं। इसका भाव यह है कि आत्मा को ही परमात्मा मानने का व्यवहार […]
शांता कुमार विश्व इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जहां किसी ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए घर-बार छोड़ दिया और फिर उसी मोक्ष को मातृभूमि की सेवा के लिए छोड़ दिया। ऐसे त्यागी और तपस्वी स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिन पर हम सब यह संकल्प करें कि अपने जीवन में उनके आदर्शों […]
अपने भक्तों, साधको का उद्धार करने वाले सूर्यदेव समस्त संसार मे एक मात्र दर्शनीय प्रकाशक है तथा विस्तृत अंतरिक्ष को सभी ओर से प्रकाशित करते हैं। सूर्यदेव मरुद्गणो, देवगणो, मनुष्यो और स्वर्गलोक वासियों के सामने नियमित रूप से उदित होते हैं, ताकि तीन लोको के निवासी सूर्य को दर्शन कर सकें। समस्त विश्व को दृष्टि […]