हम भारतीय यदि अपने आपसे पूछें कि हम कौन हैं? तो भारी वितण्डा खड़ा हो जाएगा। एक कहेगा कि हम हिंदू हैं, तो दूसरा कहेगा-नही, यह नही हो सकता, हम तो मुसलमान हैं, फिर तीसरा कुछ और बताएगा तो चौथा इन सबसे अलग होगा। जब इस पर विवाद होगा तो बिहारी, मराठी, गुजराती, राजस्थानी आदि […]
Month: September 2014
जो सामाजिक प्राणी कहा जाता है उसका सीधा रिश्ता और जवाबदेही समाज अर्थात समुदाय से होता है। जिस इंसान के सामाजिक सरोकार नहीं होते उसे सच्चा इंसान नहीं कहा जा सकता। ऎसे लोग किसी पुतले से कम नहीं हुआ करते जिनके प्रति लोग अपेक्षा, आकांक्षा और आशाओं को पूरी तरह यह समझ कर त्याग दिया […]
हफ्तों तक चलता है टायफाइड का बुखार
वर्षा शर्मा टायफायड यानी मियादी बुखार एक ऐसी बीमारी है जिससे रोगी एक लंबे और निश्चित समय तक पीडि़त रहता है। संसार में तीन करोड़ से भी ज्यादा लोग हर साल इसका शिकार होते हैं। यह रोग सालमोनेला टायफी नामक जीवाणु के संक्रमण से पैदा होता है। विकसित देशों में यह बीमारी बहुत कम होती […]
हम सभी ने जाने कितनी औपचारिकताओं के साथ हिन्दी दिवस मना लिया और खुश हो गए चलो एक आयोजन निपटा। हिन्दी सप्ताह और हिन्दी पखवाड़ा को छोड़ दें तो आज हम सभी ने हिन्दी के नाम पर कहीं पूरा और कहीं आधा दिन समर्पित कर दिया है। हिन्दी दिवस और हिन्दी के प्रति हम कृतज्ञ […]
हम सभी के लिए आज गर्व का दिवस है क्योंकि आज हिन्दी दिवस है। हिन्दी दिलों को जोड़ने और आत्मीय भावों का निरन्तर संचार करने वाली भाषा है जिसकी अहमियत हर आम और खास भारतवासी को समझने की जरूरत है। हिन्दी हमारे रग-रग और जन मन में रची-बसी भाषा है जिसका अब तक इतना उन्नयन […]
मनमोहन कुमार आर्य 10 मई सन् 1971 को विज्ञान परिषद्, प्रयाग के प्रांगण में स्वामी ब्रह्मानन्द दण्डी जी से आपने संन्यास की दीक्षा ली। आर्य जगत के लब्ध प्रतिष्ठित शोध विद्वान व हमारे प्रेरणास्रोत प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु सपरिवार इस संन्यास-संस्कार में सम्मिलित हुए थे। इस घटना के विषय में प्रा. जिज्ञासुजी ने लिखा है कि […]
गांधी परिवार से अलग तबीयत के थे फिरोज
फिरोज गांधी धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और प्रगतिशील होने के साथ ही सुलझे व्यक्तित्व के धनी थे और उन्हें बीमा व्यापार के राष्ट्रीयकरण के पैरोकार के तौर पर हमेशा याद किया जायेगा। फिरोज गांधी: ए पालिटिकल बायोग्राफी के लेखक शशि भूषण ने बताया कि फिरोज गांधी को इंदिरा के पति और नेहरू के दामाद के रूप में […]
आम तौर पर हर इंसान के साथ यही होता है। कभी वह प्रसन्न रहता है, कभी खिन्न। प्रसन्नता और खिन्नता वह ऎसे अहम कारक हैं जिन्हें आने और जाने के लिए न समय की जरूरत होती है, न किसी और की। चंचल मन की सदा-सर्वदा परिवर्तित होती रहने वाली स्थिति को पाश्चात्यों की परिभाषा में […]
स्वामी त्रिदण्डी जी महाराज अखिल भारत हिंदू महासभा के मार्गदर्शक मंडल के महासचिव हैं। उनका भारत के धर्म, संस्कृति और महासभा की नीतियों के विषय में चिंतन बहुत स्पष्ट है। उनके साथ हमारी चलभाष पर बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि इस देश में हिंदू को आज भी […]
हिन्दी को लेकर उठते सवाल
हिन्दी दिवस एक बार आकर फिर दहलीज़ पर खड़ा है । सितम्बर की चौदह तारीख़ इसके आने के लिये सरकारी तौर पर निर्धारित है । इस कारण इसे आना ही पड़ेगा । सरकारी आदेश है । हुकुम अदूली कैसे की जा सकती है ? सरकारी दफ़्तरों में महीना भर मिसल गतिशील हो जाती है । […]