यूनान देश के यवन लोगों का हिरैक्लीज’ नाम का एक देवता रहा है। जिसकी वह लंबे समय से पूजा करते रहे हैं । कौन था यह हिरैक्लीज ? यदि इस पर विचार किया जाए तो पता चलता है कि इस नाम का देवता विश्व के सबसे अधिक बलशाली व ज्ञान सम्पन्न श्रीकृष्ण जी ही थे। […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
यूनान देश के यवन लोगों का हिरैक्लीज’ नाम का एक देवता रहा है। जिसकी वह लंबे समय से पूजा करते रहे हैं । कौन था यह हिरैक्लीज ? यदि इस पर विचार किया जाए तो पता चलता है कि इस नाम का देवता विश्व के सबसे अधिक बलशाली व ज्ञान सम्पन्न श्रीकृष्ण जी ही थे। […]
मेरे एक मित्र कह रहे थे कि राजनीतिज्ञ वही होता है जो बड़ी भारी भीड़ को अपने पीछे खींचकर दूर जंगल में ले जाए और फिर वहां एक ऊंचे पेड़ पर चढ़कर चारों ओर देखकर अपने साथ आई भीड़ को अचानक यह निर्देश दे कि हम गलत दिशा में चले आए, चलो उल्टे चलते हैं। […]
जब रामचंद्र जी के साथ सभी दिव्य शक्तियों के सहयोग और संयोग की बात की जाती है तो उसका अभिप्राय यह समझना चाहिए कि न्याय, धर्म और सत्य जिसके साथ होता है, उसके साथ परमपिता परमेश्वर की शक्ति आशीर्वाद के रूप में सदा साथ बनी रहती है। प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा सात्विक भाव के रूप […]
(सुपार्श्व मंत्री ने रावण से कहा कि तुम्हें इस समय सीता जी को मारने की निम्नस्तरीय सोच का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए, अपितु अपने परमशत्रु राम के विनाश की योजना पर काम करना चाहिए। इसके लिए आपको एक वीर योद्धा का परिचय देते हुए युद्ध के मैदान में जाकर राम से युद्ध करना अपेक्षित है। […]
26 – भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास , भाग – 4 ‘शिवा बैरागी का प्रताप बना मुगलों का संताप’ इससे ग्रंथ माला के चौथे खंड में विद्वान लेखक ने राजा चंपत राय , रानी सारंधा , अमर सिंह राठौड़, राजा हरदौल सिंह, राणा भीम सिंह, अमर सिंह राठौड़ का शव और बल्लू […]
हम सभी के लिए यह बहुत अधिक प्रसन्नता का विषय है कि भारत रक्षा उपकरण निर्यात के क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है । 2014 से पहले जिस भारत को दूसरे देशों से रक्षा उपकरण खरीदने की आवश्यकता पड़ती थी , आज वही इस क्षेत्र में तथाकथित बड़ी शक्तियों से प्रतिस्पर्धा कर रहा […]
लेखक ने सन 712 ईस्वी से लेकर 1947 तक का 1235 वर्ष का भारत का स्वाधीनता संग्राम एक अनुपम और अद्वितीय ढंग से प्रस्तुत किया है। लेखक की मान्यता है कि भारतवर्ष कभी गुलाम नहीं रहा। तथाकथित गुलामी एक मतिभ्रम है। वास्तविकता यह है कि भारत अपनी स्वाधीनता की रक्षा के लिए पहले दिन से […]
18 वीं लोकसभा के चुनावों के समय विपक्ष और विशेष रूप से राहुल गांधी ने जिस प्रकार की घटिया राजनीति का प्रदर्शन किया, उस पर अब तक बहुत कुछ लिखा जा चुका है। जनता में भ्रम फैलाकर जिस प्रकार उन्हें सरकार के विरुद्ध भड़काने का काम राहुल गांधी ने किया , उसके परिणाम अभी हमें […]
[‘रक्षाबन्धन’ पर्व पर विशेष रूप से प्रकाशित ] माता का पुत्र पर जो उपकार है उसकी संसार में सीमा नहीं। यही कारण है कि हर समय और हर देश में मातृशक्ति का स्थान अन्य शक्तियों से ऊंचा समझा जाता है। जहां ऐसा नहीं है वहां सभ्यता और मनुष्यता का अभाव समझा जाता है। जब वह […]
बांह पसारे राम ने, किया लखन सत्कार। गले लगाया प्यार से , सिर सूंघा कई बार।। लक्ष्मण जी की चोट को , सह न पाए राम । नि:श्वास लेने लगे , कहा – करो आराम ।। ( आज रामचंद्र जी के लिए बहुत ही कष्ट का समय था। उन्हें ऐसा लग रहा था कि उनके […]