तेरे शहर के मेरे लोग संसार के आज तक के इतिहास में ऐसी अनेकों कहानियां बनी बिगड़ी हैं जिन्हें मैंने अपने ढंग से लिखा है तो आपने अपने ढंग से लिखा है । कहानी का सच क्या था ? – इसे ना तो वक्त ने तय किया और ना ही लोगों ने मिल बैठकर तय […]
पुस्तक समीक्षा : तेरे शहर के मेरे लोग