योग संसार के लिए भारत की अप्रतिम देन है। महर्षि पतंजलि ने योग की परिभाषा करते हुए कहा कि – ”योगश्चित्त वृत्ति निरोध:” चित्त की वृत्तियों का रोकना ही योग है। चित्त को यदि एक सरोवर मानें तो सरोवर में उठी हुई लहरों को चित्त की वृत्तियां मानना पड़ेगा । इस चित्त के सरोवर का एक किनारा […]
योग, प्राणायाम और शरीर के आठ चक्र