कुंडलियां डॉ राकेश कुमार आर्य ( 1) धर्म अकारथ कर रहे ‘धर्म’ के कारण लोग। दानव पूजे जा रहे, अधरम से कर योग।। अधरम से कर योग, मजहब मौज मनावे। खून बहाता मानव का दानव से राज करावे।। जब तक है ये खेल जगत में नहीं मिलेगा चैन। समय निकाल भजो प्रभु को भगते क्यों […]
नारी पुरुष का मेल है, मधुर प्रेम संगीत।