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गीता मेरे गीतों में : ( गीता के मूल ७० श्लोकों का काव्यानुवाद) गीत 27

कर्म योग की श्रेष्ठता

गुरु की कृपा से आता है वसंत हमारे जीवन में।
गुरु ही भरता नई ऊर्जा, नव – स्फूर्ति जन-गण में।।

करो कीर्तन सच्चे गुरु का यही वेद की आज्ञा है।
कृतघ्नता का दोष लगे ना, इस पर ध्यान लगाना है।।

साक्षात्कार जब हो जाता है, परमपिता से सीधा ही।
मिट जाते सब संशय क्लेश अवसाद बचे ना थोड़ा भी।।

कर्म क्षीण हो जाते हैं और तन – मन आनंदित होते।
ऐसे महामानव को पाकर सब जन – मन हर्षित होते।।

आध्यात्मिक, अधिदैविक ,अधिभौतिक तीनों ताप मिटें।
साक्षात्कार हो ईश्वर का तो पाप – ताप -संताप मिटें।।

जब आत्मा कह दे ईश्वर से मैं तेरी और तू मेरा है।
समझो तभी अंधकार मिटे और होता दिव्य सवेरा है।।

संन्यासी के जीवन में ऐसा अक्सर हो जाता है।
सारे मल विक्षेप धुलें और नया सवेरा आता है।।

संन्यास भाव जब सिर चढ़ बोले शिव का रूप बना लेता।
सबका हितकारी हो जाता सबको आनंद घना देता ।।

कर्म भी जब जुड़ जाते धर्म से, सच्चे शिव हो जाते हैं।
मानव के हितचिंतक बन कर कल्याणी हो जाते हैं।।

निकम्मे और प्रमादी जन कर्म का त्याग किया करते ।
‘कर्म से ही संन्यास लीजिए’ – ऐसा तर्क दिया करते ।।

कर्म के बंधन से मुक्ति का – यही उपाय बताते हैं।
कर्म करो मत – पड़े रहो, बस जीवन व्यर्थ गंवाते हैं ।।

श्री कृष्ण जी ने समझाया , अर्जुन ! मेरी बात सुनो।
जो धर्म के अनुकूल तुम्हारे उसी को अपने लिए चुनो।।

बाह्य – कर्म का त्याग सदा ही ज्ञानी जन करते आए। कर्म -त्याग मन ही कर पाता , सिद्ध पुरुष कहते आए।।

कर्म योगी होकर भी मानव , कर्म निरंतर करता जाता ।
मन में बसी कामना का भी त्याग निरंतर करता जाता।।

अच्छे कर्मों में लगे रहो तो आत्मा भी उन्नत होता।
ऐसे दिव्य -पुरुष के आगे सारा जग नतमस्तक होता।।

नित्य पाप -कर्म करने से होता आत्मा भी अधोगामी।
प्रभु भजन करने से होता आत्मा अति बलशाली।।

पाप – कर्म से बचे रहो जो चाहते हो अपना कल्याण।
जो अज्ञान ,अविवेक को मारे वही रखता है सच्चा ज्ञान।।

मोह, लोभ और काम की आंधी जिसको नहीं मिटा पाती।
जितेंद्रिय वही कहला पाता है दिव्यता उसकी बढ़ती जाती।।

यह गीत मेरी पुस्तक “गीता मेरे गीतों में” से लिया गया है। जो कि डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित की गई है । पुस्तक का मूल्य ₹250 है। पुस्तक प्राप्ति के लिए मुक्त प्रकाशन से संपर्क किया जा सकता है। संपर्क सूत्र है – 98 1000 8004

डॉ राकेश कुमार आर्य

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