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इतिहास के पन्नों से देश विदेश

ऐसे छद्म धर्मनिरपेक्षता की भेंट चढ़ गया था गांबिया

अफ्रीका में एक देश है गाम्बिया . बेहद गरीब और पिछड़े क्षेत्रों में आता है , कभी ये इलाका बेहद हरा भरा हुआ करता था और यहाँ धरती ही माँ बन कर यहाँ के निवासियों का भरण पोषण किया करती थी लेकिन अचानक ही उस पर अंग्रेजों की नजर गयी और विश्व विजय बनने के […]

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इतिहास के पन्नों से स्वर्णिम इतिहास

सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ के शासनकाल में भारत फैल गया था रूस तक

सूर्यवंशी दिग्विजयी सम्राट ललितादित्य मुक्तापीढ़ जिनके काल में भारत रूस तक फ़ैल गया था !! विजीयते पुण्यबलैर्बर्यत्तु न शस्त्रिणम परलोकात ततो भीतिर्यस्मिन् निवसतां परम्।। वहां (कश्मीर) पर शस्त्रों से नहीं केवल पुण्य बल द्वारा ही विजय प्राप्त की जा सकती है। वहां के निवासी केवल परलोक से भयभीत होते हैं न कि शस्त्रधारियों से। – […]

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इतिहास के पन्नों से

मजा लेने के लिए कत्लेआम करते थे मंगोल

मंगोल! मध्य एशिया की एक दुर्दांत बर्बर जाति, जिसे रक्त बहाना अतिप्रिय था। क्रूरता इतनी की मिनटों में हजारों लोगों का सर काट दें और कटे सरों की गेंद बना कर फुटबॉल खेलें। वे किसी गाँव पर आक्रमण करते तो समूचे गाँव को काट डालते… क्रूर और विभत्स तरीके से… पुरुषों को तुरंत, स्त्रियों को […]

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इतिहास के पन्नों से हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

18 57 की क्रांति के अमर शहीद धनसिंह कोतवाल और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का क्रांतिकारी इतिहास

मेरठ की अमर क्रांति सन 1857 और कोतवाल धनसिंह चपराना गुर्जर का इतिहास 10 मई 1857 की प्रातःकालीन बेला। स्थान _मेरठ । क्रांति का प्रथम नायक _ धन सिंह चपराणा गुर्जर कोतवाल। नारा _ मारो फिरंगियों को। मेरठ में ईस्ट इंडिया कंपनी की थर्ड केवल्री की 11 और 12 वी इन्फेंट्री पोस्टेड थी ।10 मई […]

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इतिहास के पन्नों से भयानक राजनीतिक षडयंत्र

भारत सहित पश्चिमी एशिया के इतिहास में गहरी जालसाजी की गई है अंग्रेजों द्वारा

पश्चिम एसिया और भारत-भारतीय इतिहास में अंग्रेजों द्वारा इतनी भयानक जालसाजी हुयी है कि कोई भी वर्णन पश्चिम या मध्य एसिया के इतिहास से नहीं मिलता है और पूर्व भाग के बारे में बिलकुल ही भूल गये। राजतरंगिणी के अनुसार गोनन्द वंश का ६२वां राजा हिरण्यकुल था जिसने लौकिकाब्द २२५२-२३१२ अर्थात् ८२४-७६४ ई.पू. तक शासन […]

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इतिहास के पन्नों से स्वर्णिम इतिहास

विश्व विजेता सिकंदर नहीं सम्राट शालीवाहन थे

  सम्राट विक्रमादित्य के ५९ वर्ष बाद शालिवाहन परमार की राज्याभिषेक ७७ (इ.) हुआ था तो मुर्ख वामपंथीयों का यह तथ्य बिलकुल गलत हैं की सम्राट विक्रमादित्य की हत्या उनके परपोत्र शालिवाहन ने किया हैं । मित्रों मैकॉले ने तो इतिहास को बर्बाद किया हैं पर मैकॉले के मानसपुत्र काले अंग्रेज़ो ने इस परंपरा को […]

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इतिहास के पन्नों से भयानक राजनीतिक षडयंत्र

भारत से ही सीखा है आधुनिक यूरोप ने विज्ञान

– प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज भारत पर अंग्रेजों की असली जीत 14 एवं 15 अगस्त 1947 ईस्वी को हुई है। क्योंकि उस दिन पहली बार वे भारत में अपने एक ऐसे उत्तराधिकारी समूह को अपनी सत्ता सौंप कर जाने में सफल हुये जो उनसे कई गुना बढ़कर अंग्रेजों का भक्त था और जिसे प्रत्येक भारतीय […]

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इतिहास के पन्नों से

धारा नगरी के राजा भोज का है भारत के इतिहास में विशेष और महत्वपूर्ण स्थान

  सत्यार्थ प्रकाश में महर्षि दयानंद ने लिखा है कि पत्नी और पति वियुक्त न रहें ,तथा यह भी लिखा है कि एक दूसरे पर एक दूसरे का पूर्ण अधिकार होता है। इसी सिद्धांत का अनुगामी होकर मेरा जीवन में प्रयास रहता है कि मैं जब भी कहीं देशाटन पर या देश यात्रा पर जाऊं […]

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इतिहास के पन्नों से

श्रमिक हित को समर्पित रमण भाई शाह

31 दिसम्बर/जन्म-तिथि   श्रमिकों के हित के लिए प्रदर्शन और आन्दोलन तो कई लोग करते हैं; पर ऐसे व्यक्तित्व कम ही हैं, जिन्होंने इस हेतु अच्छे वेतन और सुख सुविधाओं वाली नौकरी ही छोड़ दी। रमण भाई शाह ऐसी ही एक महान विभूति थे। रमण भाई का जन्म पुणे के पास ग्राम तलेगाँव दाभाड़े में […]

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इतिहास के पन्नों से

संघ प्रवाह के समग्र साक्ष्य

प्रवीण गुगनानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक से लेकर अब तक के सभी यानि छहों संघ प्रमुखों के साथ जिन्होंने न केवल कार्य किया हो अपितु जीवंत संपर्क व तादात्म्य भी रखा हो ऐसे स्वयंसेवक संभवतः दो-पाँच भी नहीं होंगे। आदरणीय माधव गोविंद वैद्य ऐसे ही सौभाग्यशाली स्वयंसेवक थे। उनके देहांत पर अपने […]

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