‘विशेष शेर’ दयानन्द इस चमन का, खिलता गुलाब था। ज्ञान और तेज का, वह आफत़ाब था ।। करता रहा जिन्दगी में, मुतवातिर शबाब था, भारत माँ के ताज का, वो हीरा नायाब था। वो कमशीन था, इज्जोजिल था, वागीश था वो पहुँचा हुआ दरवेश था, वो प्रभु का कृपा पात्र विशेष था। इज्जोजिल अर्थात् दिव्यता […]