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आज का चिंतन

ब्रिटिश राज में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि पगड़ी सम्भाल जट्टा

लायलपुर में शहरी बस्ती विधेयक (Colonisation Bill) के विरुद्ध चलाये जानेवाले आन्दोलन के प्रमुख आर्यसमाजी ही थे। २१ अप्रैल १९०७ के अन्त में जब लाला लाजपतरायजी लायलपुर की एक सभा में भाषण देने पहुँचे तब वहाँ उस समय के प्रसिद्ध आर्यसमाजी नेता सरदार अजीतसिंह ( अमर शहीद भगतसिंह के चाचा) का भाषण हो रहा था। […]

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समाज स्वास्थ्य

हरित ग्रेटर नोएडा में ,रोता है फेफडा*” 💭💨

आज शाम को ग्रेटर नोएडा के अल्फा -2 सेक्टर की F ब्लॉक की मार्केट गया था… … प्रदूषण🌪️ के कारण आंखों में जलन होने लगी दम घुटने लगा पूरा ग्रेटर नोएडा शहर एकदम गैस चैंबर बन गया है। ग्रेटर नोएडा का प्रदूषण समझ से परे है उत्तर भारत में इतना हरा-भरा🌳🌴🌳 शहर होने के बावजूद […]

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देश विदेश

*ऋषि सुनाक पर फूहड़ बहस*

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* ब्रिटेन में ऋषि सुनाक के प्रधानमंत्री बनने पर भारत में बधाइयों का तांता लगना चाहिए था लेकिन अफसोस है कि हमारे नेताओं के बीच फूहड़ बहस चल पड़ी है। कांग्रेस के दो प्रमुख नेता, जो काफी पढ़े-लिखे और समझदार हैं, उन्होंने बयान दे मारा कि सुनाक जैसे ‘अल्पसंख्यक’ को यदि ब्रिटेन-जैसा कट्टरपंथी […]

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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास दर्शन, अध्याय .. 8 ख विवाह और परिवार रूपी संस्था

विवाह और परिवार रूपी संस्था वास्तव में विवाह परिवार रूपी संस्था को चलाए रखने के लिए एक बहुत ही पवित्र और उत्तम संस्कार है। जिसकी तैयारी में किसी भी प्रकार का प्रमाद नहीं करना चाहिए। बहुत सोच समझ कर विवाह के संबंध स्थापित करने चाहिए । कुल, गोत्र आदि के साथ-साथ दोनों परिवारों के सामाजिक […]

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आज का चिंतन

क्या है विष्णु, क्षीरसागर, लक्ष्मी, गरुड़,शेषनाग का वैज्ञानिक सत्य

विष्णु किसको कहते हैं ? विष्णु का स्वरूप किसमें कहा जा सकता है ? क्या विष्णु की सवारी गरुड़ है ? गरुड़ क्या है ? वह विशाल सा पक्षी या कुछ और होता है ? क्षीर सागर क्या तथा कहां है ? उसमें शेषनाग पर कौन लेट रहा है ? लक्ष्मी जी पैर दबा रही […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

नेहरू की विदेश नीति के मिथक को तोड़ते राजनाथ सिंह

विदेश नीति और रक्षा नीति का राजनीति में गहरा संबंध होता है। यह दोनों अन्योन्याश्रित होते हैं। इन दोनों को लेकर ही राजनीति में कूटनीति का खेल चलता है। जो देश कूटनीति के माध्यम से अपनी राजनीति को सही दिशा देने में सफल होता है वही अपनी विदेश नीति और रक्षा नीति को सबल बनाने […]

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इतिहास के पन्नों से

आर्य संस्कृति के रक्षक गौतम आजीवन रहे थे हिंदू

( लेखक : डॉ० शंकर शरण ) ——————————————– हमारे अनेक बुद्धिजीवी एक भ्रांति के शिकार हैं, जो समझते हैं कि गौतम बुद्ध के साथ भारत में कोई नया ‘धर्म’ आरंभ हुआ। तथा यह पूर्ववर्ती हिन्दू धर्म के विरुद्ध ‘विद्रोह’ था। यह पूरी तरह कपोल-कल्पना है कि बुद्ध ने जाति-भेदों को तोड़ डाला, और किसी समता-मूलक […]

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आज का चिंतन

मनुस्मृति में क्या दी गई है धर्म की परिभाषा ?

#डॉ_विवेक_आर्य १. धर्म संस्कृत भाषा का शब्द है जोकि धारण करने वाली धृ धातु से बना है। “धार्यते इति धर्म:” अर्थात जो धारण किया जाये वह धर्म है। अथवा लोक परलोक के सुखों की सिद्धि के हेतु सार्वजानिक पवित्र गुणों और कर्मों का धारण व सेवन करना धर्म है। दूसरे शब्दों में यहभी कह सकते […]

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आर्थिकी/व्यापार

10 से लेकर 2000 तक के नोटों पर छपे हैं इन ऐतिहासिक धरोहरों के चित्त

रविराज वर्मा भारत देश अलग-अलग धर्म, संस्कृति और परंपराओं का घर है। देश की विरासत इसकी ऐतिहासिक धरोहरों में साफ झलकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक हर करेंसी नोट के सामने की ओर राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की तस्‍वीर छापता है जबकि नोट के पीछे की तरफ देश के किसी एक मॉन्‍यूमेंट की तस्‍वीर छापी जाती है […]

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देश विदेश

हू जिंताओ के साथ सी जिनपिंग ने जो कुछ किया उसको ही कहते हैं – जैसी करनी वैसी भरनी

उमेश चतुर्वेदी हू जिंताओ के साथ जो हश्र हुआ उसे ही कहते हैं ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ राजनीति और इतिहास की दुनिया में एक कहावत बार-बार दोहराई जाती है। कहा जाता है कि इतिहास खुद को दोहराता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 22 अक्टूबर 2002 की तारीख को हिमालय के दूसरी तरफ, […]

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