कविता – 12 वे देश भक्त नहीं हो सकते ….. वही देश धर्म के रक्षक हैं जो सीमा के प्रहरी होते। जिनके कारण हम देश के भीतर नींद नित्य गहरी सोते।। मैं उनको कैसे रक्षक मानूं ?- जो देश के भक्षक बन बैठे। नहीं उनको शीश झुका सकता डसने को तक्षक बन बैठे।। मैं हूँ […]
वे देश भक्त नहीं हो सकते …..