न राज्यं न च राजासीत् , न दण्डो न च दाण्डिकः । स्वयमेव प्रजाः सर्वा , रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥ न राज्य था, ना राजा था, न दण्ड था, न दण्ड देने वाला था. संवेदनशील राज्य की संवेदनशील जनता स्वयं सारी प्रजा ही एक-दूसरे की रक्षा करती थी. यही संविधान का या क़ानून का अंतिम […]