भीष्म जी के भीतर अपार धैर्य था । उन्होंने कई प्रकार की पीड़ाओं को सहन करते हुए भी कहीं पर भी असंयत भाषा का प्रयोग नहीं किया । उनकी बात को धृतराष्ट्र ने भी स्वीकार नहीं किया, परंतु इसके उपरान्त भी से उसके प्रति सद्भाव बनाए रखने में सफल रहे। एक प्रकार से उनके भीतर […]