भारत की अध्यक्षता में बीते सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक हुई थी। इस बैठक में भारत ने दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर चर्चा कराई थी, जिसे लेकर अब चीन आगबबूला हो गया है। बुधवार को चीन ने कहा कि विश्व निकाय की उच्चाधिकार प्राप्त इकाई यानी सुरक्षा परिषद विवादास्पद मुद्दे पर चर्चा […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
*जाति बनी वर्गः संविधान का कचूमर*
डॉ. वेदप्रताप वैदिक पिछले कई दिनों से संसद का काम-काज ठप्प है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच ठनी हुई है। विपक्ष के दर्जन भर से भी ज्यादा दल मोदी सरकार के विरुद्ध एकजुट होने में लगे हुए हैं। लेकिन मोदी सरकार ने क्या दांव मारा है कि सारा विपक्ष खुशी-खुशी कतारबद्ध हो गया है। […]
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे राहुल गांधी के बारे में सबसे बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि वे अपनी पार्टी को इस समय अपने पैरों पर खड़ा करने में असफल रहे हैं। राजनीतिक रूप से लड़खड़ाती कांग्रेस किसी ऐसे नेता की बाट जोह रही है जो उसे वर्तमान दलदल से बाहर निकाल सके, लेकिन राहुल […]
महात्मा गांधी से भी पहले सत्याग्रह को भारतीय स्वाधीनता संग्राम का हथियार बना देने वाले विजय सिंह पथिक भी क्रांतिकारी साहित्यकारों की श्रेणी के महान व्यक्तित्व थे। पथिक जी क्रांतिकारी व सत्याग्रही होने के अलावा कवि, लेखक और पत्रकार भी थे। अजमेर से उन्होंने नव संदेश और राजस्थान संदेश के नाम से हिन्दी के अखबार […]
हमारे जिन क्रांतिकारियों ने भारत के विषय में और भारतीय स्वाधीनता के विषय में इतने ऊंचे विचार रखे उन्हीं के कारण आज हम स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिक हैं। आज हम स्वतंत्र होकर सोच सकते हैं और स्वतंत्र होकर लिख सकते हैं। जिनके बलिदानों ने हमें आजादी की ये नेमत दी है, उनके विषय में […]
साहित्य समाज का दर्पण होता है। जैसा समाज होता है वैसा ही साहित्य दिखाई देता है। यह बात पूरी तरह सही है । जब हमारा देश पराधीननता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था और उनसे मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा था, तब हमारे देश का साहित्य और साहित्यकार भी देश की संघर्ष की उस […]
देश अपने 75 वें स्वतंत्रता दिवस के रंग में रंग गया है। सचमुच यह पावन पर्व हमें अपने स्वतंत्रता सैनानियों और अमर बलिदानियों के उद्यम और पुरूषार्थ का स्मरण कराकर अपने देश के प्रति समर्पित भाव से जीने के लिए प्रेरित करता है। भारत की संस्कृति की महानता का राज ही यह है कि […]
लेखक:- प्रशांत पोळ हमारे भारत में, जहां-जहां भी प्राचीन सभ्यता के प्रमाण मिले हैं (अर्थात नालन्दा, हडप्पा, मोहन जोदड़ो, तक्षशिला, धोलावीरा, सुरकोटड़ा, दायमाबाग, कालीबंगन इत्यादि), इन सभी स्थानों पर खुदाई में प्राप्त लोहा, तांबा, चाँदी, सीसा इत्यादि धातुओं की शुद्धता का प्रतिशत ९५% से लेकर ९९% है. यह कैसे संभव हुआ? आज से चार, साढ़े […]
. देश अपनी आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारियों में जुट गया है। किसी भी देश व समाज को खड़ा करने के लिए 74 वर्ष बहुत होते हैं। यद्यपि राष्ट्र के सनातन स्वरूप को देखते हुए 74 वर्ष एक अरब 40 करोड़ की जनसंख्या को सही दिशा देने और उसकी सभी समस्याओं का […]
डा. उदयशंकर पाण्डेय अपनी पुस्तक प्राचीन भारत की राज्य व्यवस्था’ में विभिन्न नीतिकारों, विद्वानों, ग्रंथों और स्मृतियों का उद्घरण दे देकर हमें बताते हैं कि उन सबमें राजा में किन गुणों की आवश्यक माना गया है- याज्ञवल्क्य : याज्ञवल्क्य ने राजा के गुणों की गणना के क्रम में कहा है कि-राजा को शक्ति संपन्न, […]