वेद ज्ञान का विशाल सागर है। भारत की औपनिषदिक परंपरा विभिन्न सरिताओं का प्रवाहमान दृश्य उपस्थित करती है। जो प्रवाहित होकर वेदरस के मीठे जल को सर्वत्र बांटती चलती है। जैसे नदियों से धरती पर अनेकों तालाबों, मीठे पानी की झीलों आदि का निर्माण हो जाता है और फिर वे तालाबें या मीठे पानी की […]
ईशादि नौ उपनिषद – काव्यानुवाद