कविता – 16 जल मैंने पूछा जलियांवाले बाग ! व्यथा तू कह दे मन की। कोयल है क्यों मौन यहां की कागा पीर बढ़ाते मन की।। जलियांवाला बाग यह बोला – व्यथा नहीं मेरे मन में। सौभाग्य समझता हूं अपना, छाया जनगण के मन में।। फूलों की कलियों से पूछा क्यों नहीं खिलना चाहती हो […]
जलियांवाला बाग यह बोला …